रुद्रपुर में हुई रामलीला में नृत्य करतीं सूर्पणखा।
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शहर की प्राचीन बस स्टैंड वाली रामलीला में कलाकारों ने सूर्पणखा, खर दूषण वध, रावण मारीच संवाद, सीता हरण, रावण के हमले में जटायु के घायल होने तक की लीला का मंचन किया। सूर्पणखा की भूमिका निभा रहे कलाकार ने शानदार नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रविवार रात रामलीला का शुभारंभ पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा, समाजसेवी जगदीश टंडन, पूर्व कोतवाल बिलासपुर जगदीश अरोरा, बिट्टू छाबड़ा एवं श्रीरामनाटक क्लब के संरक्षक अनिल शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। लीला की शुरूआत में रावण की बहन सूर्पणखा पंचवटी पहुंचती है और वहां मौजूद राम, लक्ष्मण को देखकर सम्मोहित हो जाती है। वह दोनों को मोहित करने का प्रयास कर विवाद करने के लिए निवेदन करती है, लेकिन दोनों के नजरअंदाज करने पर वह क्रोधित होकर सीता को मारने दौड़ती है। इसके बाद लक्ष्मण उसके नाक, कान काट देते हैं।
सूर्पणखा के अपमान का बदला लेने पहुंचे दो भाई खर और दूषण युद्ध में राम और लक्ष्मण के हाथों मारे जाते हैं। घायल सूर्पणखा अपने भाई रावण के पास लंका पहुंचती है और सीता के अद्वितीय सौंदर्य की भी बात कहते हुए रावण को उसे अपनी पटरानी बनाने का सुझाव देती है। रावण के कहने पर मारीच स्वर्ण मृग का रूप धरकर पंचवटी पहुंचता है। सीता पति राम से स्वर्ण मृग को पकड़कर लाने को कहती हैं। मायावी मारीच राम की आवाज निकालकर बचाने की गुहार लगाता है। सीता के कहने पर लक्ष्मण भाई को खोजने से जाने से पहले कुटिया में लक्ष्मण रेखा खींचकर जाता है।
इसके बाद रावण साधु का वेश बनाकर सीता का हरण कर देता है। पक्षीराज जटायु उसे रोकने की कोशिश करता है। इस पर रावण तलवार का वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर लेता है और सीता को लेकर लंका रवाना हो जाता है। रामलीला का संचालन सचिव केवल कृष्ण बत्रा ने किया। वहां पर श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल, महामंत्री विजय अरोरा, कोषाध्यक्ष नरेश शर्मा, सुभाष खंडेलवाल, विजय जग्गा, महावीर आजाद, सुशील गाबा, विजय विरमानी आदि मौजूद रहे।