कोरोना काल में इस बार मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घरों और मस्जिदों में रहकर ईद मिलादुन्नबी मनाया। उन्होंने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाई। मस्जिदों में मौलानाओं ने नमाज अदा की। कुछ उत्साही नौजवानों ने गांधी कालोनी, सीरगोटिया और अन्य मोहल्लों में बाइकों में घूमकर नारेबाजी भी की। इधर, 35 सालों में पहली बार जुलूस नहीं निकाला गया।
शुक्रवार को जुलूसे मोहम्मदी कमेटी के अध्यक्ष डॉ. शाहिद रजा ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते एहतियात के तौर पर जुलूस नहीं निकाला गया है। खेड़ा स्थित मस्जिद के पास लोगों ने गरीबों को लंगर व मिठाई का वितरण भी किया। मस्जिदों में पैगंबर के बताए गए रास्ते और उनके आदर्शों पर चलने की सलाह दी गई। इधर, खटीमा में जश्ने ईद मिलादुन्नबी शांतिपूर्वक मनाया गया। जामा मस्जिद से निकला जुलूस नगर के विभिन्न स्थानों से होकर जामा मस्जिद लौटा।
इस दौरान नमाज पढ़ ईद मिलादुन्नबी का आयोजन किया गया। वहां पर मौलाना इरफानुल हक, मौलाना फरयाद आलम, नासिर खान, सदर जुलूसे मौहम्मदी मौलाना वासित, मौलाना वाहिद, हाफिज शराफत आदि थे। इधर, यूपी से लगे गांवों मझोला, पचपेड़ा, कंचनपुरी, कलेक्ट्रेट फार्म, जमौर, नौसर के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने त्योहार शांतिपूर्वक मनाया। कार्यक्रम में नवी अहमद, मो. नाजिम, मसरूर अहमद, अख्तर अंसारी, खलील अहमद, रफीक सेठ, डॉ. शमशाद आदि थे। इधर, किच्छा में जुलूस इस वर्ष नही निकल सका।
मुस्लिम समाज के लोगों ने घरों और मोहल्लों में भव्य सजावटें की। नगर की मस्जिदों में पैगंबर मोहम्मद साहब की आमद को लेकर मजलिसें और मिलाद का आयोजन किया गया। जामा मस्जिद के इमाम मौलाना याकूबी सकाफी ने अमन की दुआ मांगी। नगर के मदरसा अरबिया इशातुल उलूम सहित कई स्थानों पर लंगर का आयोजन किया गया। वहीं, पूर्व सभासद नजाकत खान के साथ सैकड़ों लोगों ने कब्रिस्तान में कब्र पर पुष्प अर्पित किए।
ईद मिलादुन्नबी पर एहतराम के साथ निकला जुलूसे मोहम्मदी
काशीपुर/बाजपुर। सरवर-ए-कायनात हजरत मोहम्मद की यौमे पैदाईश के मौके पर जश्ने ईद मिलादुन्नबी का जुलूस अकीदत और एहतरामके साथ निकाला गया। कोरोना महामारी के कारण जुलूस में कोई नक्श शामिल नही किया गया।
शहर इमाम मुफ्ती मुनाजिर हुसैन की कयादत में जुलूस-ए-मोहम्मदी का आगाज शुक्रवार को सुबह 8 बजे मोहल्ला अली खां से हुआ। यह जुलूस महेशपुरा, जसपुर बस स्टैंड, स्टेशन रोड से एमपी चौक पहुंचा। कटोराताल विजयनगर नई बस्ती से आया जुलूस भी इसमें शामिल हो गया। जुलूस मुख्य बाजार होते हुए कर्बला मैदान पहुंचकर सलातो सलाम के साथ संपन्न हुआ। जुलूस के दौरान उलेमाओं ने रसूल अल्लाह की शान में नात कलाम और मनकवद पेश की। इस दौरान कोविड-19 के नियमों का पालन किया गया।
जगह-जगह सामाजिक व राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जुलूस का स्वागत किया। जुलूस में ईदगाह कमेटी के सदर हसीन खान, जुलूस कमेटी के नायब सदर डॉ. अब्दुल शकील, सचिव माजिद अली, शमसुद्दीन, शफीक अंसारी, मुशर्रफ हुसैन, राशिद फारुकी, अब्दुल सलीम, जफर मुन्ना, अब्दुल कादिर, नौशाद हुसैन सोनू, एमए राहुल, मौ. अशरफ, अनीस अंसारी, इलियास माहिगीर, युसुफ पेंटर, रहमत अली खान, शान खान, मुजीब आलम, अमन खान, हकीम नूरी, मंसूर अली आदि शामिल रहे।
एमपी चौक पर कांग्रेस महानगर अध्यक्ष संदीप सहगल, मुक्ता सिंह, आशीष अरोरा, शैलेंद्र मिश्रा, अरुण चौहान, जितेंद्र सरस्वती, अर्पित मेहरोत्रा, महेंद्र बेदी, जयसिंह गौतम, शशांक सिंह आदि ने फूल बरसाकर जुलूसे मोहम्मदी का स्वागत किया। इधर, बाजपुर में शुक्रवार को ईद मिलादुन्नबी का त्यौहार सादगी के साथ मनाया गया। मस्जिदों में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए नमाज अदा की गई।
कांफ्रेेंस में रसूल अल्लाह का वाकिया बयां किया
सितारगंज। जश्रे ईद मिलादुन्नबी कांफ्रेेंस में उलेमाओं ने अल्लाह के प्यारे महबूब हुजूर सल्लललाहो अलैह वसल्लम की यौम-ए-पैदाइश पर तकरीर पेश की। उन्होंने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने दुनियां में अमनो शांति का संदेश दिया। कांफ्रेंस में...सरकार की आमद का अंदाज निराला है, मक्के में हुए पैदा घर घर उजाला है नात पर लोग झूम उठे।
बारहवीं शरीफ के मौके पर बृहस्पतिवार की रात नगर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। इस दौरान कब्रिस्तान के पास गुलामाने रसूल कमेटी की ओर से कांफ्रेेंस का आयोजन किया गया। जिसमें जामा मस्जिद के इमाम मौलाना कासिम मिस्बाही, मौलाना अशरफ उल कादरी ने हुजूर की पैदाइश व उनके जीवन पर रोशनी डाली। इसके अलावा मौलाना आरिफ उल कादरी व सुनहरी मस्जिद के इमाम अजीमुद्दीन ने बताया कि कौम में हर औरत की इज्जत करनी चाहिए। सभी अपने बच्चों की तरक्की के लिए उन्हें तालीम दिलाए। शायर तौफीक कमर ने...सुबह तैबा में हुई बंटता है बाड़ा नूर का, सदका लेने नूर का आया है तारा नूर का, कारी मोअज्जम नवाज ने...अल्लाह किया जहन्नम अब भी न सर्द होगा,रो रो के मुस्तफा ने दरिया बहा दिए हैं नात पढ़कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
शायरे इस्लाम हाफिज मुनाजिर रजा ने...दिलदार का चेहरा शहे अबरार का चेहरा, है चांद से बेहतर मेरे सरकार का चेहरा नात पढ़ी। हाफिज जीशान, हाफिज यूसुफ रजा ने भी कलाम पढ़कर समां बांध दिया। इस दौरान सरकार की आमद मरहबा के नारों से आसमान गुंजायमान हो उठा। शायरे इस्लाम तस्लीम वाहिदी ने निजामत की। मध्य रात करीब दो बजे सलातो सलाम और दुरुद फातिहा के साथ कान्फ्रैंस का समापन हो गया। वहां कमेटी के अध्यक्ष मो. इमरान अंसारी, मो. आमिर, रिहान अंसारी, अनीस रजा, शहजाद, जुनैद अंसारी, तौफिक अहमद, शमसूल हसन, इकराम, मो. जाकिर, अरबाज अंसारी, सिराज मलिक, अनस सलमानी, शाहिद सलमानी, इजहार अहमद, जीशान अंसारी, मो. गजाली रजा आदि थे।
काशीपुर में जुलूसे मोहम्मदी में शिरकत करते लोग। संवाद - फोटो : KASHIPUR