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भाई करम सिंह और भाई प्रताप सिंह की याद में सजाया धार्मिक दीवान

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केलाखेड़ा गुरुद्वारा साहिब में शहीदों की जीवनी पर प्रकाश डालते एसजीपीसी अमृतसर के उत्तराखंड प्? - फोटो : KASHIPUR
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केलाखेड़ा। गुरुद्वारा साहिब में रविवार को धार्मिक दीवान सजाकर अंग्रेजी शासन काल में 100 वर्ष पूर्व देशभक्त फौजियों को लंगर कराने के लिए शहीद हुए भाई करम सिंह और प्रताप सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।
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इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी धर्म प्रचार कमेटी अमृतसर के उत्तराखंड प्रचारक भाई हरजिंदर सिंह ने शहीद भाई करम सिंह और प्रताप सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए संगत को बताया कि 100 वर्ष पूर्व अंग्रेजों द्वारा देशभक्त फौजियों से भरी रेलगाड़ी को जब अमृतसर से (वर्तमान पाकिस्तान) के लिए रवाना किया गया। बीच में आने वाले हसन अब्दाल (वर्तमान पाकिस्तान) के पास स्थित गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब के निवासियों को जानकारी होने पर उन्होंने भूखे प्यासे देशभक्त फौजियों के लिए लंगर की व्यवस्था करके रेलवे स्टेशन मास्टर से रेलगाड़ी स्टेशन पर रोकने का निवेदन किया। अंग्रेज शासन के उच्चाधिकारियों की ओर से रेलगाड़ी नहीं रोके जाने के निर्देश दिए गए थे।
इसी के चलते संगत के मुखिया भाई करम सिंह और प्रताप सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मुख अरदास कर भूखे-प्यासे देशभक्तों को लंगर कराने का दृढ़ संकल्प लिया। उसके बाद वह सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ रेल रुकवाने के लिए पटरी पर बैठ कर गुरवाणी का पाठ करने लगे। तेज रफ्तार रेलगाड़ी दो श्रद्धालु भाई करम सिंह और प्रताप सिंह को रौंदती हुई रुक गई। फौजी रेलगाड़ी से बाहर आए और उन्होंने करन सिंह और प्रताप सिंह के त्याग, सेवा, भावना को नमन किया। इस दौरान बुरी तरह घायल दोनों को रेल के पहियों से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल ले जाने लगे। उन्होंने कहा कि सबसे पहले देशभक्तों को लंगर कराया जाए। उसके बाद ही उनके इलाज का प्रयास किया जाए। देशभक्त फौजियों को लंगर कराने के बाद रेलगाड़ी रवाना होने पर दोनों घायलों को अस्पताल ले जाया गया। इसके चलते काफी समय बाद इलाज के दौरान वे शहीद हो गए। उनके अंतिम संस्कार में हिंदू, मुस्लिम, सिख सहित अन्य समुदाय के हजारों लोग शामिल हुए थे।
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केलाखेड़ा गुरुद्वारा साहिब में शहीदों को नमन करते हुए भाई हरजिंदर सिंह और सिख मिशनरी कॉलेज लुधियाना की गदरपुर इकाई के इंचार्ज देवेंद्र सिंह ने मूल मंत्र का पाठ संगत के साथ श्रवण कराकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भाई कुलदीप सिंह, बाबा देवेंद्र सिंह और भाई करनैल सिंह ने भी गुरु महिमा का बखान किया। गुरुद्वारा साहिब में सहज पाठ के भोग के बाद प्रेम सिंह परिवार की ओर से लंगर कराया गया। वहां गुरुद्वारा साहिब के प्रधान परमजीत सिंह, बलवीर सिंह, दिलबर पाल सिंह, डॉ. मनोहर सिंह, सुरेंद्र सिंह, दलजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, हरजीत सिंह, अजीत सिंह आदि थे। संवाद
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