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तलवार से नहीं, मुहब्बत के पैगाम से फैला इस्लाम

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काशीपुर में बाबा भुल्लनशाह के मजार पर दुआएं मांगते अकीदतमंद। - फोटो : KASHIPUR
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मोहल्ला कटोराताल स्थित हजरत बाबा भुल्लनशाह के आस्ताने पर सालाना उर्स का समापन कुल शरीफ के साथ हुआ। लोगों ने मुल्क में अमनोअमान और कोरोना महामारी से निजात के लिए दुआएं मांगीं।
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उर्स के दूसरे रोज शुक्रवार की रात बाबा के आस्ताने पर मजलिस में हल्द्वानी से आए मौलाना सैयद इरफान मुस्तफी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत पर आक्रमण कर रियासतें तो छीन लीं लेकिन तलवार के बूते वो इस्लाम को नहीं फैला सके। जबकि ख्वाजा गरीब नवाज ने मुहब्बत का पैगाम देकर एक साथ 90 हजार लोगों को कलमा पढ़वा दिया। कहा कि इस्लाम किसी का दिल दुखाने की इजाजत नहीं देता।
पीलीभीत से आए मौलाना मुजाहिद रजा हशमती ने कहा कि खुदा ने रसूल अकरम को कुल कायनात का नबी बनाया है। उन्होंने गरीबों, यतीमों, कमजोरों की मदद का संदेश दिया। मुफ्ती जाफर ने कहा कि औलियां अल्लाह के मकबूल बंदे है। इसके आस्तानों से फैज (फायदा) पहुंचता है। मजलिस में बरेली से आए शायरे इस्लाम मुस्तफाई रजा रजवी ने नातियां कलाम पेश किया। मजलिस में कारी मुशाहिद रजा, मुफ्ती सुहैल रजा ने खिताब किया। शनिवार की सुबह 10 बजे कुल की रस्म हुई। सूफी अबरार ने दुआ कराई। वहां दरगाह के सदर अमन खान अजहरी, अमीर दुल्हा खां, रहमत अली खां, शान खान, हाजी सलीम खां, मोहम्मद अयूब, जाकिर हुसैन उर्फ नन्हें, शाहिद हुसैन, खुर्शीद, तस्लीम, यासीन, शानू, आदि मौजूद रहे।
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