शहर में सूदखोरी का धंधा बेरोकटोक चल रहा है। सूदखोरों के चंगुल में फंसने के बाद कम ही कर्जदार उनके जंजाल से बाहर आ पाते हैं। अधिकतर तो ब्याज ही भरते रह जाते हैं। सूदखोर रकम और ब्याज की वसूली के नाम पर कर्जदार को जमकर लूटते हैं। कई बार तो ब्याज इतना ज्यादा हो जाता है कि कर्जदार का जेवर, मकान, प्लाट तक सूदखोर हथिया लेते हैं।
शहर के ट्रांजिट कैंप के जगतपुरा, आजाद नगर, राजा कालोनी, कृष्णा कालोनी, ठाकुरनगर, शास्त्रीनगर के अलावा आवास विकास कालोनी और रम्पुरा तक सूदखोरों का जाल फैला हुआ है। बड़े सूदखोर योजनाबद्ध तरीके से अवैध कारोबार चला रहे हैं। सूदखोर पहले ही ब्याज काटकर कर्ज देते हैं। कर्ज देने से पहले कर्ज लेने वाले से हस्ताक्षरयुक्त ब्लैंक चेक या स्टांप ले लिया जाता है और फिर आठ से 12 फीसदी मासिक ब्याज पर कर्ज दिया जाता है। इसके बाद मूल रकम के साथ ही ब्याज वसूली का खेल शुरू हो जाता है। मूल रकम से दो से तीन गुना से अधिक रकम कर्जदार ब्याज में चुका भी देता है लेकिन उस पर कर्जा बरकरार रहता है।
सूदखोरों की तरफ से वसूली के लिए प्रताड़ित तक किया जाता है। कभी-कभी तो अपराधियों की मदद तक ली जाती है। जब कर्जदार रकम चुकाने में असमर्थ हो जाता है तो हस्ताक्षरयुक्त कोरे चेक और कोरे स्टांप से ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू हो जाता है। चेक में मनमानी रकम भरकर या तो बाउंस कराकर मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है या फिर स्टांप के सहारे कर्जदार की संपत्ति पर कब्जा कर लिया जाता है। मुकदमा दर्ज कराने के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। संगठित रूप से सक्रिय सूदखोरों का पेट भरता रहता है और कर्जदार की जेब ढीली होते-होते वह सबकुछ गंवा बैठता है।
आवास विकास में कास्मेटिक की दुकान चलाने वाली महिला को तीन साल पहले रुपयों की जरूरत पड़ी तो उसने महिला सूदखोर से अलग-अलग किश्तों में ढाई लाख रुपये का कर्ज लिया था। सूदखोर ने उससे हस्ताक्षर किया कोरा चेक ले लिया। कर्ज देते समय ब्याज तीन फीसदी था, जो बाद में बढ़कर 12 फीसदी मासिक हो गया। महिला अब तक सात लाख रुपये की रकम दे चुकी है। इसके लिए उसने दुकान, घर, जेवर गिरवी रख दिए, लेकिन सूदखोर ने चार लाख रुपये बकाया होने की बात कह दी। उसने असमर्थता जताई तो सूदखोर ने पिछले साल चेक बाउंस कराकर उस पर मुकदमा दर्ज करा दिया। अब मामला निपटाने के लिए साढ़े चार लाख रुपये मांग रही है।
आवास विकास की महिला ने सूदखोर से दो लाख 95 हजार रुपये कर्ज लिया और दस्तखत किया चेक दे दिया। 19 हजार रुपये प्रति महीना ब्याज चुकाने के साथ ही पूरी मूल रकम के साथ छह लाख लौटा चुकी है, लेकिन अब भी उस पर तीन लाख बकाया बताया गया है। कई बार प्रताड़ित करनेे के बाद भी रकम नहीं देने पर महिला सूदखोर ने उसके ऊपर चेक बाउंस का मुकदमा दर्ज करवा दिया। अब मुकदमा हटाने सहित पूरा खर्च सहित चार लाख मांगे जा रहे हैं। कर्जा चुकाने के चक्कर में उसे अच्छी खासी चलती दुकान को बेचना पड़ा। यह कर्ज उसके लिए दर्द साबित हो रहा है।
जगतपुरा की महिला ने तीन साल पहले तीन लाख रुपये किस्तों में लिए और आठ फीसदी ब्याज की दर से रकम चुकाने की बात तय हुई थी। विभिन्न किस्तों के समय महिला से कोरे चेक लिए गए। अब तक महिला 14 लाख रुपये से अधिक चुका चुकी है। लेकिन मूल रकम का कर्जा उतना ही है। अब रुपये चुकाने में असमर्थता जताने पर उसके ऊपर दो चेक बाउंस के मुकदमे दर्ज करा दिए गए। उसका एक मकान में भी कब्जा कर लिया गया है।
एक कारोबारी की पत्नी ने महिला सूदखोर से महज एक लाख रुपये का कर्ज लिया था। लगातार ढाई साल से ब्याज सहित किस्त देने के बाद भी अभी तक कर्ज नहीं चुकाया जा सका है। अभी भी 75 हजार रुपये चुकाने हैं। सूदखोर कोरे चेक के सहारे उसे दबाव में लेकर वसूली कर रहे हैं। कभी बाजार में उसके बच्चे को रोका जाता है तो कभी पति को रोककर पैसा नहीं देने पर बेइज्जती की जाती है। ऐसे ही एक मामले में कोरे स्टांप देने वाले का मकान भी कब्जा लिया गया। उसे मजबूरन शहर छोड़कर जाना पड़ा।
संगठित गिरोह की तरह चलता है धंधा
आवास विकास क्षेत्र में एक महिला सहित कुछ रसूखदार सूदखोर हैं जो संगठित ढंग से कारोबार को चलाते हैं। ये लोग कर्जदार से लिया चेक परिचित सूदखोर के नाम मनमानी रकम भरकर उसके मार्फत बैंक से बाउंस कराकर मुकदमा दर्ज कराते हैं। ये चर्चित महिला भी कईं लोगों को कर्जा देकर मनमानी वसूली के बाद चेक बाउंस के मुुकदमे दर्ज करा चुकी है। उसके साथ सूदखोरी का कारोबार करने वाले अन्य लोग खाली रहते हैं और उनका काम बस सूद वसूलना ही है। कई बार तो पुलिसकर्मी भी सूदखोरों की मदद कर कर्जदारों को परेशान करते हैं। सूदखोरों में बुजुर्ग महिला भी शामिल है जो पुलिस में शिकायत होने पर खुद को लाचार साबित करने में कसर नहीं छोड़ती।
शिकायत करने से कतराते हैं लोग
बेहद जरूरतमंद व्यक्ति ही सूदखोर से कर्ज लेता है, इसलिए उस पर कर्ज चुकाने का खासा दबाव रहता है। कर्जदार तो पूरी रकम चुकाना चाहता है, मगर ब्याज की रकम ही इतनी ज्यादा होती है कि उसकी कमाई इसे चुकाने में ही चली जाती है। सिर पर कर्ज होने की वजह से वह पुलिस प्रशासन से शिकायत करने का जोखिम उठाने में कतराता है। ऊपर से सूदखारों का रसूख भी उनको ऐसा करने से रोक देता है।
सौ दिन में चुकाना होता है दस हजार का कर्ज
ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में गरीब तबके के लोगों के बीच सूदखोरी का धंधा खूब चलता है। यहा रकम भले ही कम होती है मगर ब्याज ठीक ठाक रहता है। एक सूदखोर से संपर्क करने पर उसने बताया कि दस हजार रुपये का कर्ज चुकाने के लिए सौ दिन का वक्त दिया जाता है। प्रतिदिन 130 रुपये की किस्त जमा करनी पड़ती है। अगर एक दिन किसी कारण किस्त नहीं दी तो 50 रुपये का ब्याज चढ़ जाता है। अगर दूसरे दिन किस्त जमा नहीं कर पाया तो ब्याज की राशि दोगुनी हो जाती है। यह ब्याज सहित किस्त तो रकम के अनुसार तय होती है।
सूदखोरों के खिलाफ शिकायतें मिल रही हैं। ये लोग अवैध रूप से लोगों को पैसा देकर मनमाने तरीके से वसूली करते हैं। कर्जदारों से दस्तखत किया कोरा चेक या स्टांप भी ले लिया जाता है। इंटेलीजेंस को ऐसे लोगों को चिन्हित करने के निर्देश देकर रिपोर्ट मांगी जा रही है। अगर कोई सूदखोरों के उत्पीड़न से परेशान है तो वह पुलिस से सीधे शिकायत करे या फिर ऊधमसिंह नगर पुलिस के व्हाट्स-एप 9012656516 पर भी अपनी समस्या बता सकते हैं। आरोपी चाहे कोई भी हों, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी, ऊधमसिंहनगर