पिता-भाई से दूरी और मां की फटकार से क्षुब्ध होकर 14 वर्षीय किशोरी ने फांसी लगाकर खुदकशी कर ली। किशोरी ने सुसाइड नोट में पिता व भाई से दूरी, पढ़ाई का छूटना, जीवन में हुए उठापटक, के अलावा मां के तल्ख व्यवहार का जिक्र किया है। जिंदगी की आखिरी चिट्ठी में किशोरी का अपने पिता के प्रति प्रेम दिखाई पड़ा है, जिसमें उसने लिखा है ‘मां आपने कहा था अपने पापा की बेटी है तो मर जा। हां मैं अपने पापा की बेटी हूं’।
स्टेडियम रोड प्रभात कालोनी निवासी सुमित्रा की 16 वर्ष पूर्व मोहल्ला गंज निवासी दीपक ठाकुर से शादी हुई थी। शादी से उनके एक बेटा बेटी हुए। एक वर्ष पूर्व विवाद के चलते सुमित्रा ने अपने पति दीपक को तलाक देकर नवंबर में आवास विकास कालोनी में संगीत विद्यालय चलाने वाले मोहल्ला किला निवासी मनोज राजपूत पुत्र किशनलाल से शादी कर ली। बेटे को पहले पति के पास छोड़कर वह नाबालिग बेटी को अपने साथ ले गई। शादी के बाद सुमित्रा महुआखेड़ागंज स्थित एक फैक्ट्री में काम करने लगी। पारिवारिक उठापटक के चलते कक्षा सात के बाद उसकी नाबालिग बेटी की पढ़ाई छूट गई।
मनोज पुराने मकान को ध्वस्त कर नया मकान बनवा रहा है। इसके चलते उसने मोहल्ला किला बाजार में एक सर्राफ की दुकान के ऊपर का हिस्सा किराए पर लिया था। करीब 15 दिन पहले से वह यहां रह रहे थे। मंगलवार सुबह साढ़े 10 बजे वह पत्नी को एमपी छोड़ने गया था। इस दौरान बेटी घर पर ही थी। जब वह वापस लौटा तो बेटी का शव कुंडे से लटका था। सूचना पर एसएसआई राजेश यादव, उपनिरीक्षक दिनेश बल्लभ, जयपाल सिंह, मंजू पवार आदि मौके पर पहुंचे। पुलिस को कमरे से एक डायरी मिली है। पुलिस ने कमरे को लॉक कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मनोज ने बताया कि सुबह काम को लेकर मां-बेटी के बीच कहासुनी हुई थी। आवेश में उसने यह कदम उठा लिया।
किशोरी का सुसाइड नोट
‘आई हेट यू मॉम। आपने कहा था कि मर जाना अगर अपने पापा की बेटी है। तो हां हूं, ये करने का ये तरीका है तो मैं हूं अपने पापा की बेटी। मैं अपने भाई को बहुत प्यार करती हूं। वो दोनों मुझसे अलग है, मुझे अच्छा नहीं लगता’
जज्बात समझते तो बच जाती बेटी
छोटी सी उम्र में आत्मघाती कदम उठाने पीछे क्या कारण हो सकता है। पिता और भाई से दूर होने से मासूम एकदम अकेली हो गई थी। नौकरीपेशा होने के कारण मां भी बेटी पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाती थी। मां-बाप अगर बेटी के जज्बात समझते तो शायद उसकी जान बच जाती। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार टूटते संयुक्त परिवार, माता-पिता का कामकाजी होना, बच्चों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देना बच्चों को भी स्वाभाव से जिद्दी और उग्र बना देता है। इससे उनमें अवसाद बढ़ रहा है। एकल परिवारों में माता-पिता दोनों के कामकाजी होने की वजह से उनके पास बच्चों की समस्याओं पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं होती। इससे लगातार कुंठा के चलते बच्चा मानसिक अवसाद की हालत में पहुंच जाता है।माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों की समस्याओं को सुनें और उन्हें सुलझाने की कोशिश करें। बच्चों को पर्याप्त समय देते हुए उनकी समस्याओं को सुन कर ऐसे हादसों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
पुराने फोटो में खुद को किया क्रास
आत्महत्या से पूर्व जया ने अपने भाई के साथ खिंचवाए गए फोटो में अपने चेहरे पर क्रास का निशान लगा दिया। फोटो के पीछे उसने आई लव यू भाई, आई मिस यू भाई और आई लव पापा लिखा है। वहीं डायरी में उसने अपने पालतू कुत्ते लकी से बेहद लगाव होने की बात भी लिखी है। उसने लिखा कि पिछले दिनों लकी बहुत बीमार हो गया था लेकिन भगवान की कृपा से वह अब ठीक हो गया। यह भी लिखा है कि वह लकी को भी बहुत मिस करेगी।