उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में विशेष श्रेणी के यात्रियों के निशुल्क यात्रा प्रकरण में रुद्रपुर डिपो के करीब 75 फीसदी परिचालक जांच के दायरे में आ गए हैं। मुख्यालय स्तर पर इन परिचालकों से रिकवरी की जा सकती है। रुद्रपुर डिपो से परिवहन मुख्यालय को भेजी गई सूची में इन परिचालकों के नाम और उनकी ओर से सांसद कोटे में टिकटों की सूचना भेजी गई है।
रोडवेज बसों में यात्रियों के टिकट काटने के एनालॉजिक्स ईबीटीएम सॉफ्टवेयर में बीती 23 मार्च को अपग्रेशन के बाद रुद्रपुर डिपो में करीब 300 वरिष्ठ नागरिकों के टिकट सांसद कोटे में कट गए थे। करीब 20 दिन बाद मामला पकड़ में आया था। रुद्रपुर डिपो से इसकी रिपोर्ट तैयार कर परिवहन मुख्यालय देहरादून को भेजी गई है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में करीब रुद्रपुर डिपो के करीब 75 फीसदी परिचालकों के नाम शामिल हैं। मामले में परिचालकों से मुख्यालय स्तर पर जल्द पूछताछ हो सकती है। साथ ही जरूरत पड़ने पर रिकवरी भी हो सकती है। इधर, परिचालक स्वयं को निर्दोष मानते हुए मुख्यालय के अधिकारियों को इसका दोषी मान रहे हैं। वर्तमान में रुद्रपुर डिपो में 92 बाह्य स्रोत और 58 संविदा परिचालक तैनात हैं। कार्रवाई होने पर कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
परिचालकों से रिकवरी की तैयारी करना उनके साथ अन्याय है। असली गड़बड़ी अधिकारी स्तर पर हुई है। मुख्यालय से किसी भी परिचालक को सॉफ्टवेयर अपग्रेशन की सूचना नहीं दी गई थी। इसकी रिकवरी अधिकारियों से होनी चाहिए। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
- महेंद्र सिंह जीना, प्रदेश अध्यक्ष, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद।