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पुलिस से नहीं हारा, कैंसर से हार गया मिंटू

Mon, 12 Oct 2015 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/काशीपुर।
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 सामान्य कद-काठी का बाहुबली सतीश चौधरी उर्फ मिंटू चौधरी 23 सालों तक पुलिस के लिए चुनौती बना रहा। जेल से बाहर आने के कुछ समय बाद ही वह किसी न किसी अपराध में गिरफ्तार होकर जेल चला जाता। जेल ही उसका घर बन चुका था। 23 साल से वह आतंक का पर्याय बन चुका था।
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सतीश चौधरी पर विरोधियों को गिन-गिन कर ठिकाने लगाने के आरोप लगते रहे थे। कुछ बड़े राजनैतिक नेताओं पर उसका संरक्षक होने की भी चर्चाएं भी रहीं। सतीश चौधरी ने पुलिस पर उसका एनकाउंटर करने की साजिश रचने के भी आरोप लगाए। इसी के चलते एक बार तो उसने अदालत से खुद को बेड़ियां लगाने की मांग की थी ताकि पुलिस उसे भागने के नाम पर एनकाउंटर न कर दे। वह पुलिस से तो हारा नहीं लेकिन कैंसर से जिंदगी की लड़ाई हार गया। पुलिस रिकार्ड के अनुसार सतीश चौधरी पहली बार 1992 में लगभग 15 वर्ष की उम्र में डाक्टर लेन निवासी टीटू पुत्र रामस्वरुप की हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुआ था और आखिरी बार जुलाई 2014 में अर्पित अग्रवाल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुआ। 1992 के बाद जेल आना-जाना उसकी नियति बन गई। इन 23 सालों में मिंटू के खिलाफ वर्ष 1992 से 2014 तक हत्या के नौ, हत्या के प्रयास 10, गैंगस्टर एक्ट के 6, गुंडा एक्ट के 2, चार सौ बीस का 1, रंगदारी के 2, षड्यंत्र रचने के 6 मुकदमे दर्ज हुए हैं। उसके खिलाफ कुल छोटे-बड़े 52 मुकदमें दर्ज थे। अधिकांश मुकदमे छूट गए। एक में तीन साल की सजा हुई थी। वह प्रदेश की विभिन्न जेलों में रहा। कालाढूंगी में पुलिस चौकी फूंकने का वह मुख्य आरोपी था।     
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