गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति और राज्यपाल डॉ. केके पाल ने कहा कि कृषि के बिना विकास का कोई भविष्य नहीं है। राज्यपाल ने पर्वतीय राज्यों में तेजी से कम हो रही कृषि पर चिंता जताई और कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय संपूर्ण देश के लिए अपने दृष्टिकोण को छोड़े बिना पर्वतीय कृषि के विकास के लिए भी खुद को समर्पित करें।
इस अवसर पर नैनीसैनी पिथौरागढ़ निवासी कविता बिष्ट को बीएससी (कृषि) डिग्री प्रोग्राम में कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। इसके अलावा 14 को कुलपति स्वर्ण पदक, 15 कुलपति रजत पदक, 12 कुलपति कांस्य पदक, 154 पीएचडी, 287 परास्नातक और 820 स्नातक डिग्रियां दी गईं।
कुलाधिपति डॉ. केके पाल ने कहा कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में महिला किसान हैं। इन सबको कई समस्याओं का समाना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए विकास में प्राथमिकता पर्वतीय कृषि को दी जानी चाहिए। पर्वतीय राज्य खाद्यान्न संकट का सामना कर रहे हैं। इतना होने पर भी उत्तराखंड का हिमालयी क्षेत्र कई जड़ी-बूटियों और सगंध पादपों के लिए जाना जाता है। इनका सही उपयोग प्रदेश के किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
कुलाधिपति ने पर्वतीय खेती के विकास का एक रोड मैप भी विश्वविद्यालय के सामने रखा और कहा कि किसान मित्र, नई और कम लागत वाली तकनीक विकसित की जानी चाहिए। स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिकता से जोड़ें और जैविक खेती में व्यवस्थित शोध करें। जल संकट को देखते हुए फसलों की पानी पर निर्भरता कम से कम करने की कोशिश होनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए भी विश्वविद्यालय को काम करना चाहिए।
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पलायन एक बड़ी समस्या है। पर्वतीय क्षेत्र में फसल उत्पादकता, आधुनिक तकनीक आदि की कमी है। उन्होंने कहा कि कृषि नहीं रहेगी तो कृषि विश्वविद्यालय भी नहीं रहेगा। कृषि मंत्री ने जैविक खेती के विकास पर जोर दिया और कहा कि प्रदेश में किसानों को व्यवसायी के रूप में भी स्थापित करने की जरूरत है।
इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एके मिश्रा ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। कुलपति ने बताया कि विश्विद्यालय ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट के लिए 66 आवेदन किए हैं। 2016-17 में विश्वविद्यालय ने 5533 क्विंटल उच्च गुणवत्ता का ब्रीडर बीज और पांच लाख पौध का उत्पादन किया। विश्वविद्यालय को अब प्रदेश के किसानों की आय को दोगुना करने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी मिली है।
समारोह के आयोजक कुलसचिव डॉ. एपी शर्मा ने संचालन किया। दीक्षांत समारोह में किच्छा विधायक राजेश शुक्ला, विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता एवं निदेशक, विद्वत परिषद के सदस्य, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र और उनके अभिभावक आदि उपस्थित थे। समारोह में कुलाधिपति ने 1261 छात्रों को विभिन्न उपाधियां प्रदान की।