एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में निलंबित पीसीएस अफसर एनएस नगन्याल के खिलाफ एसआईटी को पुख्ता साक्ष्य मिल गए हैं। एसआईटी को मिली एफएसल रिपोर्ट में पिछली तारीख में की गई जमीन की 143 में नगन्याल के हस्ताक्षरों की पुष्टि हुई है। गिरफ्तारी के डर से भूमिगत नगन्याल के खिलाफ कोर्ट से एनबीडब्ल्यू पहले ही लिया जा चुका है। इधर, एसआईटी ने नगन्याल की गिरफ्तारी के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं।
बाजपुर तहसील की जांच मेें खुलासा हुआ था कि तत्कालीन चकबंदी अधिकारियों ने पिछली तारीख में काश्तकारों की जमीनों की 143 रिपोर्ट तैयार की थी। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर अधिकारियों ने काश्तकारों की भूमि का 143 कर करोड़ों का मुआवजा निर्धारण कर दिया था। कुछ समय पूर्व एसआईटी ने तत्कालीन एसडीएम एनएस नगन्याल से पूछताछ की थी। तब नगन्याल ने चकबंदी अधिकारियों की ओर से तैयार की गई 143 रिपोर्ट में किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं होने की बात कही थी।
इसके बाद एसआईटी ने हस्ताक्षर के नमूनों को जांच के लिए देहरादून एफएसल भेजा गया। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार रविवार को मिली एफएसएल रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है कि 143 की पत्रावलियों में किए गए हस्ताक्षर नगन्याल के ही हैं। इससे एसआईटी को नगन्याल के खिलाफ पिछली तारीख में भूमि का 143 करने का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल गया है। इसके साथ ही एफएसएल रिपोर्ट में तत्कालीन पेशकार और कुछ चकबंदी अधिकारियों के भी हस्ताक्षर उन्हीं के होने की पुष्टि हुई है। अब जल्द ही एसआईटी एनएस नगन्याल के साथ ही कुछ चकबंदी अधिकारियों की गिरफ्तारी कर सकती है। बता दें कि जांच के दौरान ही एसआईटी की ओर से गलत तरीके से मुआवजा लेने वाले 60 काश्तकारों के बैंक खातों को भी सीज किया गया है। एफएसल रिपोर्ट के बाद एसआईटी काश्तकारों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है।
मुआवजा कम लिया पर संख्या अधिक
रुद्रपुर। एसआईटी की अभी तक की जांच में पिछली तारीख में भूमि की 143 कराकर मुआवजा डकारने में बाजपुर तहसील के काश्तकार सबसे आगे हैं। उक्त तहसील में काश्तकारों ने अन्य तहसीलों की अपेक्षा मुआवजा कम लिया है] लेकिन मुआवजा लेने वालों की संख्या अन्य तहसीलों से अधिक है। अब तक की जांच में काश्तकारों की ओर से आठ करोड़ से 15 करोड़ तक का मुआवजा लेने की पुष्टि हुई है।
एक दिन में 120 लोगों की पिछली तारीख में हुई थी 143
बाजपुर में तत्कालीन अफसरों और तहसील कर्मियों ने बड़े घोटाले को अंजाम देने के लिए एक ही दिन में 120 काश्तकारों की जमीनों का 143 करा दिया। इसमें 35 मामले एनएच-74 के थे। एसआईटी ने पिछली तिथियों के इन्हीं 35 मामलों को अपनी जांच में शामिल कर इनकी पत्रावलियों को एफएसल जांच के लिए देहरादून भेजा था।
काश्तकारों के हस्ताक्षर बगैर खसरों का 143
बाजपुर तहसील में किए गए 143 के मामलों में कई मामले ऐसे भी है, जिनमें अफसरों ने काश्तकारों की भूमि का 143 किया, लेकिन 143 की पत्रावलियों में काश्तकारों के हस्ताक्षर ही नहीं है। जमीनों की 143 करने के लिए तहसील कर्मियों ने काश्तकारों से उनके खसरों के दस्तावेज लिए और बांकी प्रक्रिया खुद ही पूरी कर ली। काश्तकारों को यह भी नहीं पता कि कब उनकी भूमि की 143 हुई थी और कितना मुआवजा निर्धारित हुआ था।