बाजपुर में फर्जी नंबरों पर दौड़ रहे डंपरों की जांच पूरी हो गई। पुलिस ने जिन चार डंपरों को कब्जे में लिया था, उनमें दर्ज नंबर जांच में फर्जी पाए गए हैं। पुलिस गोरखधंधे की कड़ी को जोड़ने की कोशिश में जुटी है। पुलिस टीम इन डंपरों के वास्तविक मालिकों और दो संदिग्धों की तलाश में रोहतक में डेरा डाले हुए है।
अमर उजाला ने बाजपुर में चोरी के वाहन दौड़ने को लेकर कई खबरें प्रकाशित की थीं। इनका संज्ञान लेकर हरकत में आई पुलिस ने बन्नाखेड़ा क्षेत्र में खनन कार्य में चल रहे चार संदिग्ध डंपरों को जांच के लिए कब्जे में लिया था। तीन डंपर बन्नाखेड़ा में रहने वाले दो व्यक्तियों और एक डंपर बैलपड़ाव में रहने वाली महिला के नाम पर चल रहा था। पुलिस ने वाहनों पर लगी प्लेटों पर दर्ज नंबर परिवहन विभाग में जांचे तो फर्जी पाए गए। इन वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर भी मिटे हुए हैं। मामले को गंभीरता से लेकर अब पुलिस इनके वास्तविक मालिकों को खोजने में जुटी है।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक पुलिस के हाथ गोरखधंधे के अहम सुराग लगे हैं। इसमें फाइनेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों की मिलीभगत का भी अंदेशा जताया जा रहा है। फाइनेंस करने के बाद गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है और ये गाड़ियां एक से दूसरे और दूसरे से तीसरे को बेच दी जाती हैं। पकड़ से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट लगाकर कागजात भी तैयार कर लिए जाते हैं। गोरखधंधे के सरगना सहित दो लोगों के नाम पुलिस को पता चल गए हैं। इसके अलावा कर्नाटक की फाइनेंस कंपनियों के बारे में जानकारियां हाथ लगी हैं। चार डंपर जिन मालिकों के नाम चल रहे थे, वे भी कागजात नहीं दिखा पाए।
एएसपी काशीपुर डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया बन्नाखेड़ा चौकी में खड़े किए गए चार डंपरों में अंकित नंबर प्रथमदृष्टया जांच में फर्जी पाए गए हैं। वाहनों के चेसिस और इंजन नंबर भी मिटाए गए हैं। वाहनों के असल मालिक का पता लगाने के लिए दो दरोगाओं की अगुवाई में पुलिस की टीम रोहतक भेजी गई है। इन वाहनों को फाइनेंस करने वाली कंपनियों के बारे में भी मालूमात की जा रही है।
गोरखधंधे का सरगना भागा बिहार
फाइनेंस के चोरी वाहनों का कनेक्शन कर्नाटक से रोहतक के जरिये बाजपुर तक है। रोहतक में लंगड़ा नाम से चर्चित एक व्यक्ति पूरे खेल का मास्टरमाइंड है। जब अमर उजाला ने एक महीने पहले मामलों को उजागर करना शुरू किया था तो पुलिस छानबीन करते हुए लंगड़े के ठिकाने तक पहुंच गई थी। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए शातिर व्यक्ति बिहार भाग गया था। बिहार में मोबाइल लोकेशन ट्रेस हुई थी, लेकिन आरोपी ने नंबर बंद कर दिया था। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि रोहतक के रहने वाले एक व्यक्ति का डंपरों के मामले से कनेक्शन है। उसकी तलाश में टीम गई है। आरोपी के बिहार भागने के बाद उसका नंबर बंद आ रहा है।
किंदा के नाम दर्ज डंपर का नंबर पुलिस जांच में फर्जी
भाजपा नेता कुलविंदर सिंह किंदा के नाम पर वन निगम में पंजीकृत डंपर का नंबर भी पुलिस की जांच में फर्जी पाया गया है। 12 नवंबर के अंक में अमर उजाला ने तिपहिया नंबर पर दौड़ रहा था डंपर शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। आरटीआई के आधार पर लिखी खबर में बताया गया था कि जिस नंबर पर डंपर चल रहा था, वह रोहतक में तिपहिया वाहन का है। इस मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि किंदा के नाम पर जो डंपर का नंबर वन निगम में दर्ज था, वो परिवहन निगम में जांच में टेंपो का निकला है। इंजन और चेसिस नंबर को हरियाणा आरटीओ में जांचा गया तो वहां भी वह टेंपो नंबर निकला है। इसमें फर्जीवाड़ा पाया गया है।