शहर में एक बड़ी डकैती पुलिस की मुस्तैदी से बच गई। धारदार हथियारों से लैस डकैतों ने गंगापुर रोड स्थित टीवीएस लुकास के गोदाम में डकैती का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने एक सिक्योरिटी कर्मी पर धारदार हथियार से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जबकि उसके दो अन्य साथियों को तमंचे के बल पर पर बंधक बना लिया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने घेराबंदी की तो डकैतों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई होता देख डकैत भाग निकले। बाद में पुलिस ने सर्चिंग अभियान चलाते हुए एक डकैत को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर किच्छा बाईपास रोड से लूट का माल ले जाने के लिए लाए गए ट्रक को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।
पुलिस को मौके से वारदात में लिप्त एक तमंचा, तलवार, रॉड और एक बाइक भी मिली। पुलिस के मुताबिक जिस गोदाम को लूटने के लिए बदमाश आए थे, उसमें करीब 10 करोड़ रुपये का माल था। गंगापुर रोड पर दश चौराहे के पास गल्ला मंडी निवासी राजेश जैन का गोदाम है, जो लुकास टीवीएस को किराए में पर दिया हुआ है।
गोदाम में टाइगर सिक्योरिटी एजेंसी रूपनगर हल्द्वानी की सिक्योरिटी तैनात है। सोमवार तड़के करीब तीन बजे लालकुआं निवासी सिक्योरिटी कर्मी बालम सिंह गोदाम के मुख्य गेट पर ड्यूटी कर रहा था, जबकि उसके दो अन्य साथी शिमला बहादुर निवासी संजीव कुमार और आवास विकास निवासी मोहन सिंह धामी गोदाम में बनाए गए सिक्योरिटी कर्मियों के रूम में सो रहे थे।
इसी बीच धारदार हथियारों से लैस छह बदमाश वहां पहुंचे और बालम सिंह पर धारदार हथियार से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद बदमाश उस कमरे में गए, जहां पर सिक्योरिटी कर्मी संजीव और मोहन सो रहे थे। वहां पहुंचते ही बदमाशों ने उन्हें तमंचे के बल पर बंधक बना लिया।
इससे पहले कि बदमाश सिक्योरिटी कर्मी से गोदाम की चाबी लेकर लूटपाट करते, गश्त कर रही ट्रांजिट कैंप थाने की चीता पुलिस सायरन बजाते हुए वहां से गुजरी। पुलिस के सायरन की आवाज सुनकर बदमाश कुछ देर के लिए बाहर की ओर आ गए। बताया जा रहा है कि इसी का फायदा उठाते हुए एक सिक्योरिटी कर्मी ने तत्काल मामले की जानकारी पुलिस को दी।
सूचना पर एसएसपी नीलेश आनंद भरणे, कोतवाल रुद्रपुर जेसी पाठक, ट्रांजिट कैंप थानाध्यक्ष सुशील कुमार पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और घेराबंदी कर दी। पुलिस को देख बदमाशों ने तमंचों से ताबड़तोड़ कई रांउड फायर कर दिए। जवाब में पुलिस ने भी छह-आठ फायर किए, जिससे बदमाशों के हौसले पस्त हो गए और वे अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग निकले।
बदमाशों को भागते देख पुलिस कर्मियों ने उनका पीछा भी किया, लेकिन वे हत्थे नहीं चढ़े। बाद में पुलिस ने घायल सिक्योरिटी कर्मी बालम सिंह को जिला अस्पताल में भर्ती कर, सर्च अभियान के दौरान एक बदमाश को उसके कपड़ों पर लगे खून के धब्बों को देखते हुए किच्छा बाईपास रोड से पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम शरीफ खां निवासी ग्राम धनतिया, थाना फतेहगंज (बरेली) बताया।
बाद में पुलिस ने उसकी निशानदेही पर लूट के माल को लोड करने के लिए लाए गए ट्रक को किच्छा बाईपास रोड स्थित एफसीआई गोदाम के पास से बरामद कर लिया। साथ ही जब पकड़े गए बदमाश को घटनास्थल पर लाया गया तो वहां पर पुलिस को एक तमंचा, खून से सनी हुई तलवार, रॉड भी मिली। एसएसपी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि जल्द ही अन्य बदमाशों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक डकैती में शामिल बदमाश रुद्रपुर के साथ ही बाहर के रहने वाले हैं। इनमें खेड़ा, रेशमबाड़ी, बरेली के साथ ही पीलीभीत के बदमाश शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक फरार सभी बदमाश फिलहाल पुलिस की रडार पर हैं, जो जल्द ही गिरफ्तार कर लिए जाएंगे।
टीवीएस लुकास के गोदाम में करोड़ों रुपये का माल था, लेकिन माल की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए थे। पुलिस का मानना है कि अगर सीसीटीवी कैमरे लगे होते, तो बदमाशों की पहचान हो सकती थी।
पुलिस मुठभेड़ से बचकर बदमाश भागने लगे। बदमाशों को भागता देख पुलिस ने उनका पीछा किया। इससे पहले कि पुलिस एक बदमाश को पकड़ पाती, वह अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से बहने वाली नाले में कूद पड़ा और फरार हो गया, इसी तरह अन्य बदमाश भी भाग निकले।
पुलिस के मुताबिक जब बदमाश वारदात को अंजाम देने के लिए सिक्योरिटी कर्मियों को बंधक बना रहे थे, उसी समय पुलिस के गश्ती वाहन का सायरन बज उठा। सायरन बजता देख बदमाशों ने वहां रखी सिक्योरिटी कर्मियों की वर्दी पहन ली।
बाद में जब बदमाश मुठभेड़ के बाद भागने लगे तो वहां मौजूद सिक्योरिटी कर्मियों के साथ ही वर्दी पहनकर गेट से बाहर आ रहे बदमाशों को देख पुलिस कंफ्यूज हो गई। पुलिस एक ही ड्रेस में सिक्योरिटी कर्मी और बदमाशों को देख यह पता नहीं लगा पाई कि इनमें बदमाश कौन हैं और सिक्योरिटी कर्मी कौन हैं। पुलिस के अनुसार अगर यह कंफ्यूजन न होता तो शायद बदमाश या तो ढेर होते या फिर पुलिस गिरफ्त में होते।