एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के मुख्य आरोपी डीपी सिंह ने एसआईटी से बचने के लिए तमाम कानूनी दांवपेच आजमाए, लेकिन एसआईटी की सक्रियता से उसका हर दांव नाकाम साबित हुआ। लुक आउट सर्कुलर जारी होने से विदेश भागने की उसकी मंशा पर भी पानी फिर गया। एसआईटी ने डीपी के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले ही केविएट दाखिल कर दी, जिससे कोर्ट से भी डीपी को राहत नहीं मिल सकी। जब एसआईटी ने एक-एक कर उसके बचने के सभी रास्ते बंद कर दिए तो डीपी को आत्मसमर्पण करने को मजबूर होना पड़ा।
बीते मार्च में तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन द्वारा एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले का राज खोलने के बाद घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए एसआईटी ने तहसीलवार जांच शुरू कर दी। जसपुर और काशीपुर तहसील की जांच में एसआईटी के हाथ तत्कालीन एसएलओ डीपी के घोटाले में लिप्त होने के कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे थे। इसके आधार पर एसआईटी ने डीपी सिंह को मुख्य आरोपी बना दिया था।
डीपी के खिलाफ और मजबूत साक्ष्य जुटाने के लिए एसआईटी ने लगातार दोनों तहसीलों के 100 से अधिक काश्तकारों और सरकारी कर्मचारियों से भी गहन पूछताछ की थी। साक्ष्य जुटाने के बाद एसआईटी ने डीपी की गिरफ्तारी का खाका तैयार किया तो डीपी ने हाइकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया, लेकिन एसआईटी केे शपथ पत्र दाखिल करने के बाद हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की तो डीपी सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंच गया। भूमिगत हुए डीपी के विदेश भागने की आशंका पर लुक आउट सर्कुलर भी जारी किया गया था, लेकिन एसआईटी ने डीपी से पहले ही सुप्रीम कोर्ट केविएट दाखिल कर दी थी।
उत्तराखंड में पुलिस द्वारा किसी पीसीएस अधिकारी के खिलाफ केविएट दाखिल करने का पहला मामला भी हुआ था। इसके बाद फरार डीपी की धरपकड़ के लिए एसआईटी ने दिल्ली, लखनऊ, देहरादून, हरिद्वार, बरेली और बदायूं में लगातार 12 जगह दबिश देकर 35 से अधिक लोगों से उसके बारे में पूछताछ भी की, लेकिन डीपी पकड़ में नहीं आ सका। सुप्रीम कोर्ट में ही एसएलपी डालने के लिए डीपी ने नौ वकील खड़े किए थे, लेकिन फिर भी उसे कोर्ट से राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट में दो एसएलपी दाखिल करने वाले डीपी को थक हारकर एसआईटी के आगे आत्मसमर्पण करना पड़ा।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ था केस
एडीएम प्रताप शाह की तहरीर पर 11 मार्च 2017 को सिडकुल चौकी पुलिस ने एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नजीबाबाद और रुद्रपुर, एनएचएआई देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, जसपुर, गदरपुर, खटीमा, रुद्रपुर, बाजपुर, किच्छा और सितारगंज के एसडीएम, एसडीएम में तैनात रीडर, पेशकार, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, खतौनी से जुड़े अधिकारी, चकबंदी से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया था। एसएलओ और उनके कार्यालय में तैनात कर्मचारियों का नाम अगले दिन दर्ज कराया था।
अब तक नौ लोगों को जेल, डीपी का दसवां नंबर
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी अब तक घोटाले में लिप्त नौ लोगों को जेल भेज चुकी है। घोटाले का खुलासा होने के बाद तीन जून को पहली गिरफ्तारी जसपुर से निलंबित पेशकार विकास चौहान की हुई थी। विकास पर सरकारी दस्तावेज को नष्ट करने का आरोप था। इसके बाद 7 नवंबर को एसआईटी ने निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, निलंबित संग्रह अमीन अनिल कुमार, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पडलिया, रिटायर्ड तहसीलदार भोले लाल, अनुसेवक रामसमुझ, स्टांप वेंडर जीशान और किसान ओम प्रकाश के साथ ही चरन सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा। दसवें नंबर पर अब मुख्य आरोपी डीपी सिंह को भी जेल भेजने की एसआईटी पूरी तैयारी कर चुकी है।
पूछताछ के बाद तनाव में आया डीपी
एनएच-74 भूमि मुआवजे घोटाले का मुख्य आरोपी डीपी सिंह बृहस्पतिवार को जब आत्मसमर्पण करने के लिए एसएसपी कार्यालय पहुंचा तो उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, लेकिन जब एसआईटी ने ढाई घंटे की पूछताछ के बाद उसे हिरासत में लेकर पंतनगर थाने के लिए भेजा तो पुलिस की जिप्सी में बैठते वक्त डीपी पूरी तरह तनाव में आ गया था। थाने जाने से पहले भी डीपी की नजर अपने वकीलों को ढूंढ रही थी, लेकिन पुलिस ने उसे बिना समय दिये गाड़ी में बैठाया और थाने ले गई।
पुलिस से बचने को पूर्वी उत्तर प्रदेश में छिपा रहा डीपी
एनएच भूमि मुआवजा घोटाले में मुख्य आरोपी डीपी सिंह एसआईटी की गिरफ्त से बचने के लिए 26 दिन तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में छिपा रहा। यहीं से उसने सभी कानूनी प्रक्रियाओं को भी पूरा किया। विदेश जाने की कोशिश भी डीपी ने की, लेकिन एसआईटी द्वारा जारी किये गये लुक आउट सर्कुलर ने उसकी इस मंशा पर भी पानी फेर दिया था। दिलचस्प यह है कि एसआईटी तमाम भागदौड़ के बाद भी डीपी को नहीं पकड़ सकी थी।