एनएच चौड़ीकरण की जद मेें आई जमीनों के मोटे मुआवजे ने कई काश्तकारों के परिवार में दरार पैदा कर दी है। मुआवजे में हिस्सा पाने के चक्कर में सालों पहले हो चुके मौखिक बंटवारे को खुद ही खारिज करा रहे हैं। वे कागजों के आधार पर मुआवजे की रकम में हिस्से की मांग कर रहे हैं। पारिवारिक विवादों के चलते 250 किसानों को मिलने वाले छह करोड़ के मुआवजे पर अड़ंगा लगा है।
एनएच-74 के चौड़ीकरण की जद में जिले में 84 गांवों के काश्तकारों की जमीनें अधिग्रहीत की गईं थीं। अधिग्रहण में जमीनों के आने और भूमि अधिग्रहण पुनर्वास अधिनियम में संशोधन के बाद ग्रामीण क्षेत्र में अधिग्रहीत जमीन का चार गुना मुआवजे का प्रावधान हो गया था। इसके बाद मुआवजे में हिस्से के लिए भाइयों में ही मनमुटाव हो गया।
अधिग्रहण से पहले कई जमीनों का भाइयों में बंटवारा भी हो चुका था, लेकिन बंटवारे कागजों में नहीं चढ़ाए गए थे। इसके चलते बंटवारे के बाद भी जमीनों के खसरों में भाइयों के नाम अलग नहीं हो सके हैं। एनएच की जद में आई जमीन पर जिस भाई का कब्जा था, उससे मिलने वाले मुआवजे में अन्य जगहों में बंटवारे में मिली जमीन पर काबिज भाई हिस्सा मांग रहे हैं। नियम के अनुसार कागजों के आधार पर ये लोग मुआवजे के हिस्सेदार हैं।
करीब 275 मामलों में एनएचएआई की तरफ से मुआवजा रिलीज कर दिया था, लेकिन भाईयों की आपत्तियों के चलते एसएलओ दफ्तर ने मुआवजे के वितरण में रोक लगा दी थी। करीब 25 मामलों में एसएलओ ने आपत्तियों की सुनवाई करने के बाद निस्तारित कर मुआवजा वितरित कर दिया। लेकिन 250 मामलों में छह करोड़ रुपये आपत्तियों की वजह से वितरित नहीं हो पाया है।
एनएच की अधिग्रहीत जमीनों में भाइयों के विवादों की वजह से करीब 250 किसानों को दिया जाने वाला छह करोड़ का मुआवजा रोका गया है। करीब 25 मामलों को निस्तारित किया जा चुका है। अन्य मामलों की भी सुनवाई कर निस्तारित करने का प्रयास किया जा रहा है।
-उत्तम सिंह चौहान, एसएलओ