एनएच-74 के चौड़ीकरण की जद में आई वर्ग चार की जमीनों के 37 मामलों में मुआवजा भुगतान को लेकर संशय बना हुआ है। वर्ग चार की जमीन सरकारी होती है, लेकिन जमीन को भूमिधरी करने के लिए शासनादेश जारी हो चुका है। मुआवजा बंटने से कानूनी अड़चने पैदा न हो, इसलिए एसएलओ दफ्तर परीक्षण कराने के साथ ही इसको लेकर पूर्व में हुए शासनादेश की प्रतियां भी जुटा रहा है। दिलचस्प बात है कि इन मामलों में मुआवजा भुगतान को लेकर किसी ने प्रार्थना पत्र भी नहीं दिया है। इधर, एसआईटी जांच की जद में खसरों के 80 मामलों का 12 करोड़ का मुआवजा भुगतान भी रोका गया है।
भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी की जांच के बाद अब तक पांच पीसीएस अफसर सहित 22 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा आर्बिट्रेशन के गलत फैसलों को लेकर तत्कालीन आर्बिट्रेटर पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव जांच के घेरे में है। इधर, अब मुआवजा वितरण में खामी न हो, इसलिए एसएलओ दफ्तर दस्तावेजों को जांच परखकर ही भुगतान कर रहा है। इसी वजह से वर्ग चार की जमीन के मुआवजे का भुगतान रोका गया है। ऐसे 37 मामले हैं, जिनमें दो करोड़ 90 लाख रुपयों का भुगतान होना है। भुगतान की यह प्रक्रिया वर्ष 2017 से रुकी हुई है। हालांकि वर्ष 2015 या उससे पूर्व ऐसे मामलों में मुआवजा भुगतान हो चुका है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन डीएम को वर्ग चार की जमीनों पर मुआवजा निर्धारण के लिए अपने स्तर पर फैसले लेने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद एसएलओ दफ्तर से ऐसी जमीनों के अवार्ड बनाकर एनएचएआई मुख्यालय को भेजे गए थे। हालांकि सरकारों ने वर्ग चार की जमीनों को भूमिधरी करने के लिए शासनादेश भी जारी किए थे। अब एसएलओ दफ्तर इन शासनादेशों की कापियां जुटा रहा है, ताकि मुआवजा वितरण के बाद सवाल नहीं उठ सके। वहीं, खास बात यह है कि इन मामलों में किसी ने भी मुआवजे के लिए आवेदन नहीं किया है।
कोट - वर्ग चार की जमीनों के 37 मामलों में वर्ष 2017 से मुआवजा नहीं बांटा गया है। मुआवजे के लिए किसी ने आवेदन भी नहीं किया है। इनमें मुआवजा वितरण को लेकर परीक्षण कराया जा रहा है। ऐसी जमीनों को भूमिधरी करने के लिए पूर्व में शासनादेश भी जारी हुए हैं। पहले इन मामलों को परीक्षण कर लें कि इनका भुगतान सही है गलत है। इसके बाद भी इसमें आगे की कार्यवाही होगी।
- उत्तम सिंह चौहान, एसएलओ।