फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रिया ने फर्जी हस्ताक्षर कर लिया था बिजली कनेक्शन

Thu, 07 Jun 2018 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो   रुद्रपुर। 
विज्ञापन
जमीन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जमीनों की धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के सहारे बिजली कनेक्शन सहित अन्य मामलों में जेल में बंद तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह, एलाइड इंफ्रा की एमडी प्रिया शर्मा और निदेशक सुधीर चावला की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। तीन मामलों की एफएसएल रिपोर्ट में दस्तावेजों में फर्जी दस्तखत होने और जमीन का इकरार नामा फर्जी होने की पुष्टि हो गई है। एफएसएल रिपोर्ट से आरोपियों के खिलाफ पुलिस को मजबूत साक्ष्य भी हासिल हो गए हैं। जांच में सामने आया कि प्रिया शर्मा ने फर्जी हस्ताक्षर कर बिजली कनेक्शन हासिल किया था।
विज्ञापन


26 जनवरी को प्रिया और सुधीर के खिलाफ एसआईटी ने रुद्रपुर कोतवाली में पहला मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा गया था कि किसानों से मिले करोड़ों की रकम को खपाने के लिए प्रिया ने स्टांप वेंडर जीशान के साथ फाजलपुर महरौला में ऐसी जमीन का इकरारनामा किया था, जो उसके नाम पर नहीं थी। इसके अलावा केसर शुगर वर्क्स बहेड़ी के अपर महाप्रबंधक एएम गर्ग ने कहा था कि किच्छा के बंडिया में उनकी फर्म की जमीन की बिक्री के लिए कंपनी अध्यक्ष सतीश मोहन शर्मा और प्रिया के बीच मेमोरंडम ऑफ अंडर स्टेडिंग हुआ था। लेकिन, बाद में इसे निरस्त कर दिया था।

प्रिया शर्मा और गोपाल ने सतीश के फर्जी हस्ताक्षरों से आवेदन कर बिजली कनेक्शन हासिल किया था। इसके बाद प्रिया और गोपाल के खिलाफ किच्छा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। वहीं प्रिया, पीसीएस अफसर डीपी सिंह और सुधीर के खिलाफ किच्छा कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें कहा गया था कि प्रिया और सुधीर ने टोल प्लाजा की जमीन का मुआवजा हासिल करने के लिए चुकटी देवरिया के पांच काश्तकारों से 5.348 हेक्टेयर जमीन का इकरारनामा किया था। इकरारनामे की एवज में डेढ़ करोड़ से अधिक रुपये काश्तकारों को मिलने थे।
विज्ञापन


आरोप था कि किसानों के फर्जी प्रार्थना पत्र तैयार कर एनएचएआई को छह हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देने को भेजा गया था। किसानों ने एसआईटी के समक्ष पेश कर दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर होने से इनकार किया था। इसके बाद तीनों मामलों के दस्तावेज एफएसएल को जांच को भेजे गए थे। इसकी रिपोर्ट एसआईटी को मिल गई है। रिपोर्ट में साफ है कि टोल प्लाजा वाले आवेदन पत्र में किसानों के दस्तखत फर्जी किए गए थे। बिजली के कनेक्शन लेने को लेकर दिए आवेदन पत्र में भी कंपनी अध्यक्ष के दस्तखत फर्जी पाए गए हैं। इसके अलावा फाजलपुर महरौला की जमीन को लेकर किया गया इकरारनामा भी फर्जी है।  

एफएसएल रिपोर्ट में प्रिया शर्मा और अन्य लोगों द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनके आधार पर जमीनों की धोखाधड़ी करने की पुष्टि हुई है। तीनों केसों के लिए एफएसएल रिपोर्ट मजबूत साक्ष्य होगा।  
विज्ञापन

डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें