फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला अस्पताल के पास नाले में फेंका जैव चिकित्सीय कचरा

Thu, 07 Dec 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
विज्ञापन
ट्रचिंग ग्राउंड के आगे एनएच-74 किनारे फेंका गया मेडिकल वेस्ट। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
शहर में निजी अस्पतालों के साथ ही सरकारी अस्पतालों का जैव चिकित्सीय कचरा खुले में फेंका जा रहा है। नगर निगम द्वारा ट्रचिंग ग्राउंड में फेंके जा रहे कूड़े को जेसीबी से सपाट कर दिये जाने से मेडिकल वेस्ट कूड़े में ही मिल जा रहा है। बुधवार को जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय के गेट पर नाले में भी जैव चिकित्सीय कचरा पड़ा मिला। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह कूड़ा जिला अस्पताल से डाला गया। 
विज्ञापन


दूसरों को जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण के निर्देश देने वाला स्वास्थ्य महकमा स्वयं भी निस्तारण को लेकर सतर्क नहीं है। इस लापरवाही से शहरवासियों की जान को खतरा हो सकता है। हालांकि जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय का ग्लोबल इनवार्यमेंट सोल्यूशन के साथ अनुबंध है। इसके बावजूद यह लापरवाही समझ से परे है। इसके साथ ही ट्रचिंग ग्राउंड के आगे एनएच-74 से सटाकर कूड़ा डाला गया था। 

लगातार खुले में बायोमेडिकल वेस्ट फेंकने के बावजूद नगर निगम और जिला प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं। इससे शहरवासियों को जान का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में प्रमुख अधीक्षक डॉ. अमीता उप्रेती का कहना है कि यह जैव चिकित्सीय कचरा जिला अस्पताल का नहीं हैं। यहां से प्रतिदिन कूड़ा ग्लोबल संस्था को निस्तारण के लिए भेजा जाता है। कई लोग गेट के बाहर कूड़ा फेंक जाते हैं। इसके पूर्व में जिला प्रशासन और नगर निगम से शिकायत की जा चुकी है। गेट पर कूड़ादान रखने की भी मांग की गई है।
विज्ञापन


मेडिकल वेस्ट में ग्लूकोज की बोतलें गायब
रुद्रपुर। जिला चिकित्सालय के आगे नाले और ट्रंचिंग ग्राउंड के किनारे मिले जैव चिकित्सीय कचरे में इस्तेमाल की गई पट्टियां, रूई, सीरिंज और ग्लूकोज के पाइप मिले, जबकि ग्लूकोज की बोतलें नहीं मिलीं। ऐसे में अस्पताल कर्मियों द्वारा मिलीभगत से इन बोतलों को कबाड़ी को बेचने की आशंका व्यक्त की जा रही है। अधिकांश स्थानों पर मिल रहे मेडिकल वेस्ट में ग्लूकोज की बोतलें नहीं मिल रही हैं।

जिला अस्पताल का जैव चिकित्सीय कचरा प्रतिदिन ग्लोबल संस्था को भेजा जा रहा है। इस्तेमाल की गई सीरिंज को ब्लीचिंग किया जा रहा है। कर्मचारियों द्वारा ग्लूकोज की बोतलें कबाड़ियों को बेचने की बात बेबुनियाद हैं। नाले में मिले जैव चिकित्सीय कचरे के बारे में जानकारी नहीं है। 
डॉ. अजय वीर सिंह, प्रबंधक, जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय, रुद्रपुर 

नगरीय क्षेत्र में खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकना गलत है । अगर कहीं मेडिकल वेस्ट फेंकने की सूचना मिलती है तो तत्काल कार्यवाही की जाएगी। अभी फिलहाल उनके संज्ञान में कहीं से ऐसा मामला नहीं आया है। सफाईकर्मियों को हिदायत दी गई है कि वे कहीं से मेडिकल वेस्ट लाकर ट्रंचिंग ग्राउंड में न फेंके। ऐसा करने पर कार्यवाही की जाएगी। अगर कोई ट्रंचिंग ग्राउंड में मेडिकल वेस्ट फेंके तो उस पर भी नजर रखकर कार्रवाई करें। - जयभारत सिंह, एमएनए, नगर निगम, रुद्रपुर

गाजियाबाद तक पहुंच रहा रुद्रपुर का कचरा
रुद्रपुर। रुद्रपुर के ट्रंचिंग ग्राउंड से कबाड़ी लाखों रुपये कमा रहे हैं। ट्रंचिंग की पॉलीथीन युक्त कूड़े को कबाड़ी खरीदकर सीमावर्ती बिलासपुर भेज रहे हैं। बिलासपुर से यह कूड़ा गाजियाबाद व नोएडा तक भेजा जा रहा है। ट्रचिंग ग्राउंड से कूड़ा बीन रहे बच्चों के भी जान खतरा बना हुआ है।

एनएच-74 किनारे ट्रंचिंग ग्राउंड पर सुबह जब नगर पालिका के कूड़ा वाहन पहुंचते हैं तो रुद्रपुर के रम्पुरा, रेशमबाड़ी, पहाडग़ंज के बच्चे व बुजुर्ग कचरे से प्लास्टिक बीनने के लिए पहुंच जाते हैं। प्लास्टिक बीनने के लिए कभी वह वाहन चालक से मिन्नतें करते दिखते हैं तो कभी आपस में लड़ते नजर आते हैं। कूड़ा बीनने वाले से ये लोग पॉलीथिन व अन्य प्लास्टिक के कूड़े को पांच-दस रुपये प्रति किलो की दर से कबाड़ियों को बेचते हैं। ये लोग 100 से 150 रुपये प्रतिदिन कमा लेते हैं।

ट्रंचिंग ग्राउंड पर कूड़ा बीनता मिला 11 वर्षीय बालक बोला कि वह घर में अकेला कमाने वाला है। कूड़े की पॉलीथिन बेचकर परिवार का भरण-पोषण करता है। उसके पिता का देहांत हो चुका है। रेशमबाड़ी की 12 वर्षीय बालिका ने कहा कि घर की आर्थिक हालत अच्छी न होने के कारण वह कूड़ा बीनती है। प्लास्टिक सही होने पर कबाड़ी 10 रुपये प्रति किलो तक खरीद लेते हैं। सूत्रों ने बताया कि कबाड़ी करीब 100 टन प्लास्टिक का कूड़ा एकत्रित होने पर वाहनों से कगलासपुर के बड़े कबाड़ियों को बेचते हैं। जहां से कूड़े को गाजियाबाद और नोएडा तक भेजा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें