सतर्कता विभाग ने सर्वे लेखपाल को निजी स्कूल के शिक्षक से विरासतन और फसली दर्ज करने के नाम पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे हल्द्वानी ले जाया गया है।
जयंत नगर शक्तिफार्म निवासी शंकर विश्वास न्यू ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल में शिक्षक हैं।
दस नवंबर को शंकर कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में स्थित सर्वे नायब तहसीलदार कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अपने परिवार की तीन एकड़ जमीन की विरासतन और फसली दर्ज कराने के लिए सर्वे लेखपाल को आवेदन दिया। सर्वे लेखपाल वार्ड संख्या आठ निवासी संतोष कुमार श्रीवास्तव पुत्र छबील चंद्र ने शंकर से काम के एवज में ढाई हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इसके बाद शंकर ने सतर्कता कार्यालय हल्द्वानी में शिकायत की थी।
मंगलवार को सतर्कता विभाग के सीओ अरविंद डंगवाल के नेतृत्व में टीम ने सुनियोजित ढंग से शंकर को रसायन लगे पांच-पांच सौ के पांच नोट देकर कार्यालय भेजा। पीछे से सतर्कता टीम भी वहां पहुंच गई। शंकर ने संतोष कुमार श्रीवास्तव के हाथ में ढाई हजार रुपये दे दिए। टीम ने तुरंत उसे रंगे हाथ धर लिया। टीम ने वहां मौजूद कर्मचारियों को कार्रवाई होने तक बिठाए रखा। रिश्वत लेते पकड़े गए सर्वे लेखपाल पर कानूनगो का भी अतिरिक्त प्रभार है।
सीओ ने बताया कि एक सप्ताह पहले शिक्षक ने सर्वे लेखपाल के रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। इसलिए हमने योजना बनाकर मंगलवार को छापेमारी की और आरोपी लेखपाल को रंगे हाथ दबोच लिया। बताया कि आरोपी सर्वे लेखपाल के खिलाफ 7/13 (1) डी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। हल्द्वानी सतर्कता कार्यालय से बुधवार को उसे नैनीताल कोर्ट में पेश किया जाएगा। टीम में ट्रैप प्रभारी प्रमोद शाह, इंस्पेक्टर इंदर सिंह राणा, कांस्टेबल नागेंद्र, मनोज मठपाल समेत दस कर्मी शामिल थे।
22 साल की नौकरी पर लगा बट्टा
शिक्षक से फसली और विरासतन दर्ज कराने के एवज में ढाई हजार की रिश्वत ने सर्वे लेखपाल संतोष कुमार श्रीवास्तव की 22 साल की नौकरी पर बट्टा लगा दिया। तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में वर्ष 1995 में संतोष की पहली तैनाती गाजियाबाद में हुई थी। उत्तराखंड बनने के बाद 2001 में संतोष को सितारगंज सर्वे नायब तहसीलदार कार्यालय में तैनात किया गया। दो साल तक यहां नौकरी करने के बाद जसपुर और फिर हल्द्वानी में नौकरी की। 2015 में संतोष का फिर सितारगंज स्थानांतरण कर दिया गया। तब से वह यहां कार्यरत है।
फफक पड़ा सर्वे लेखपाल
रंगे हाथ दबोचने के बाद सर्वे लेखपाल संतोष कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ करीब ढाई घंटे तक कार्यालय में अधिकारी व कर्मचारियों ने लिखा पढ़ी की। इसके बाद जब कार्रवाई पर अंतिम मोहर लगने के बाद उसके हस्ताक्षर कराए गए तो वह फफक-फफक कर रो पड़ा। संतोष के दो बेटे और दो बेटियां हैं। बेटे को जब घटना का पता चला तो फौरन दफ्तर पहुंचा। पिता को देखकर नम आंखों से लौट गया।
विरासतन में कटना था मृत दादी का नाम
शिक्षक शंकर विश्वास के पिता संजय विश्वास का एक बड़ा भाई मनीमोहन और छोटा भाई मनी है। बड़े की मौत हो चुकी है। शामिल खाते की करीब तीन एकड़ जमीन तीनों भाइयों के साथ ही उनकी मां लक्ष्मी विश्वास के नाम पर पौन-पौन एकड़ दर्ज है। वर्ष 2012 में लक्ष्मी विश्वास का देहांत हो गया जिसके बाद भूमि तीनों भाइयों के नाम पर विरासतन दर्ज होनी थी। शंकर ने बताया कि नवीन परती में उनके गांव की सभी जमीन को नदी में दर्शाया गया है, जबकि आधी जमीन नदी में है और आधी पर खेती हो रही है। इसके लिए भी उन्होंने सर्वे लेखपाल के समक्ष नाराजगी जताई थी।
अधिकारियों पर भी लटकी तलवार
सितारगंज। सर्वे लेखपाल के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद अधिकारियों पर भी जांच की तलवार लटक गई है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि जो भी कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा गया उसका अधिकारी भी जिम्मेदार माना जाएगा। अगर, शासन के निर्देश को सही माना जाए तो इस मामले में अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। चकबंदी विभाग में करीब डेढ़ साल से सर्वे नायब तहसीलदार का पद खाली है। कानूनगो उमाकांत मिश्रा को चार्ज दिया गया था, जो बीते अप्रैल तक प्रभारी सर्वे नायब तहसीलदार रहे। उसके बाद जुलाई में नानकमत्ता उपतहसील शुरू हुई तो वहां के नायब तहसीलदार भुवन चंद सती को सर्वे नायब तहसीलदार का चार्ज भी दे दिया गया। ब्यूरो