जिले में झोलाछापों का जाल फैलता जा रहा है। 10 दिन के भीतर झोलाछाप की दवा खाने से रुद्रपुर ब्लॉक में मौत की दूसरी घटना सामने आई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग खामोश है। रविवार को ट्रांजिट कैंप में झोलाछाप की दवा खाने से एक बालक की मौत हो गई। इधर, बच्चे को दिमागी बुखार से पीड़ित होने की भी आशंका जताई गई है।
ट्रांजिट कैंप निवासी मजदूर विष्णु कुमार के आठ वर्षीय पुत्र मिंटू की दो दिन से तबीयत खराब थी। उसे लगातार उल्टी और दस्त हो रहे थे। आर्थिक हालात कमजोर होने के कारण उसने अपने पुत्र को क्षेत्र के एक झोलाछाप को दिखाया। लेकिन घर लाने के बाद दवा खाने के बाद बालक की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई।
दस्त के साथ मिंटू को खून की उल्टियां आने लगीं तो परिजन घबराकर उसे जिला अस्पताल ले आये। जहां बालक की गंभीर हालत देखकर डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया। लेकिन कुछ संभ्रात लोगों व समाजसेवियों के दखल के बाद डॉक्टर उसे भर्ती करने को तैयार हो गए। लेकिन बालक की हालत बेहद गंभीर होने के कारण कुछ देर बाद ही उसे मृत घोषित कर दिया गया।
बच्चे की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। बालक के दिमागी बुखार से पीड़ित होने की भी आशंका व्यक्त की जा रही है। बता दें कि गत 30 अगस्त को पडेरी गांव, किच्छा निवासी युवक लखविंदर की भी झोलाछाप की दवाई खाने से मौत हो मौत हो गई थी। सिडकुल चौकी इंचार्ज केजी मठपाल और ट्रांजिट कैंप थानाध्यक्ष जीबी जोशी ने कहा कि बालक की मौत की सूचना उन्हें नहीं दी गई।