मकान पर कब्जे की नीयत से वृद्धा की हत्या करने के आरोपी अभियुक्त को द्वितीय एडीजे न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने जमानतियों के बंधपत्र भी निरस्त कर दिए हैं। इस मामले में विवेचक एसआई नरेशपाल सिंह ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था।
मोहल्ला काजीबाग निवासी महेंद्र पाल पुत्र जानकी प्रसाद ने दो अगस्त 2012 को काशीपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके रिश्ते की ताई कलावती (65) पत्नी चन्ना सिंह के मकान में अनिल कुमार किराये पर रहता था। एक अगस्त 2012 को रात करीब 10 बजे वह अपने पड़ोसी संतोष पाल के साथ अपनी ताई के घर रक्षाबंधन की मिठाई देने गया था।
वहां उसे अनिल कुमार घर से निकलता दिखाई दिया। ताई के बारे में पूछे जाने पर उसने गालीगलौज करते हुए कहा कि अब यह मकान मेरा है, तुम्हारी ताई ने यह मकान मुझे बेच दिया है। अनिल नशे की हालत में अभद्रता करने लगा, जिस पर दोनों लौट आए। दो अगस्त की सुबह करीब सात बजे मोहल्लेवासियों ने उसकी ताई कलावती को खून से लथपथ हालत में देखा।
मौके पर पहुंचने पर ताई मृत अवस्था में मिली। पुलिस ने महेंद्र पाल की तहरीर पर आरोपी अनिल के खिलाफ धारा 302 के तहत केस दर्ज करते हुए अनिल को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर कलावती की हत्या में प्रयुक्त सरिया बरामद कर लिया था।
अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे के साक्षी महेंद्र पाल, रघुनाथ अरोरा, सागर पाल, डॉ. एसएस नबियाल आदि को परीक्षित कराया गया। बचाव पक्ष की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश चंद्र जोशी और बीसी नौटियाल ने की। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद द्वितीय एडीजे ओमकुमार ने वृद्धा की हत्या के आरोपी अनिल कुमार को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।