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जलौनी लकड़ी के परमिट पर शीशम की लकड़ी की तस्करी

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गूलरभोज। पीपलपड़ाव रेंज के जंगल से जलौनी लकड़ी के परमिट पर शीशम की तस्करी की जा रही थी। विभाग के सचल दस्ते ने एक वाहन से शीशम के 23 गिल्टों बरामद किए हैं। लोगों के अनुसार इसमें वन विभाग की मिलीभगत से शीशम की लकड़ी की तस्करी हो रही है।
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पीपलपड़ाव रेंज के वनक्षेत्राधिकारी की ओर से एक ट्रैक्टर ट्राली को जलौनी लकड़ी का परमिट जारी किया गया था। रविवार शाम रेंज की बौर बीट से वाहन में लकड़ी लादकर ले जाई जा रही थी। जंगल मेें यह ट्राली एक गड्ढे में फंस गई।

रेंज के वनकर्मी ट्राली को निकालने में जुटे हुए थे। इसी बीच मुखबिर ने पुलिस और वन विभाग के सचल दल को लकड़ी की तस्करी की सूचना दे दी। इसके बाद सचल दल के लोग मौके पर पहुंचे। ट्रॉली पर लदी लकड़ी को जांचने को लेकर वन कर्मियों की वन सचल दस्ते व पुलिस के साथ नोकझोंक हो गई। जांच में पता चला कि जलौनी लकड़ी के नीचे शीशम के 23 गिल्टे रखे गए थे।
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सचल दल और पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई की बात कही तो वनकर्मियों ने आनाकानी की। डीएफओ कल्याणी नेगी के निर्देश पर वाहन को लकड़ी सहित रेंज कार्यालय पहुंचा दिया गया। सचल दस्ते के वन दरोगा कैलाश तिवारी के अनुसार पकड़ी गई प्रतिबंधित शीशम की इमारती लकड़ी की गोलाई पांच और छह फुट है। इसकी कीमत लगभग दो से ढाई लाख रुपये होगी।

डीफओ कल्याणी नेगी ने बताया कि जलौनी लकड़ी का मानक मात्र 10 से तीस सेंटीमीटर की गोलाई की लकड़ी ही ले जाई जा सकती है। इससे ऊपर की लकड़ी है तो वह तस्करी में ही आएगी। बताया कि वन कर्मियों की संलिप्तता पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

रियायत देय वाले ग्रामीणों को ही दिया जाता है परमिट
गूलरभोज। जलौनी लकड़ी का परमिट वन विभाग के गजट नोटिफिकेशन में सम्मिलित गांवों के ग्रामीणों को ही दिया जा सकता है, जिन्हें रियायती देय लागू है। गूलरभोज में जलौनी लकड़ी ले जा रहा व्यक्ति गदरपुर के किसी गांव का रहने वाला था। नियमानुसार उसको परमिट दिया ही नहीं जा सकता है। प्रभागीय वन अधिकारी कल्याणी नेगी ने बताया कि बाहर के व्यक्ति को परमिट दिया ही नहीं जा सकता है। यदि ऐसा है तो वह उसकी जांच कराएंगी।
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