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खतौनी में बगैर आदेश के ही दर्ज कर दिए कई और नाम

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जसपुर में तहसील अभिलेखों में छेड़छाड़ कर राजस्व अधिकारियों ने एक परिवार की कृषि भूमि में कुछ और लोगों के नाम इंद्राज (अंकित) कर दिए। खतौनी देखकर भू-स्वामियों के पैरो तले जमीन खिसक गई। जानकारी करने पर पता लगा कि नई फसली में अन्य लोगों के नाम बगैर किसी आदेश के दर्ज किए गए हैं। इस मामले में शिकायत होने पर जांच जसपुर के तहसीलदार को सौंपी गई। तहसीलदार ने जांच रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी है। जांच में तहसील के राजस्व कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
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काशीपुर के मोहल्ला महेशपुरा निवासी नारायण दास के नाम जसपुर तहसील के ग्राम शिवराजपुर पट्टी में खाता संख्या 160, 175 व 395 कुल रकबा 5.602 हेक्टेयर भूमि थी। 18 दिसंबर 2008 को नारायण दास की मृत्यु हो गई। 8 अप्रैल 2009 को उक्त भूमि माल अभिलेखों में विरासतन उनके चारों बेटों राजीव कुमार, अनिल कुमार, सुनील कुमार व अजय कुमार के नाम दर्ज हो गई। बाद में तीन भाइयों ने अपने हिस्से का कुछ रकबा चामुंडा विहार काशीपुर निवासी सुरेखा और विनीत आदि को बेच दी। उनके नाम भी सह खातेदार के रूप में दर्ज हो गए। एक वर्ष पहले राजीव कुमार ने तहसील के कंप्यूटर से खतौनी निकलवाई। खतौनी में उनके परिवार के अलावा अन्य नाम भी शामिल होना पाए गए। 1426 फसली की खतौनी में बिना किसी आदेश के उनके साथ ही नत्थू पुत्र जय सिंह, मुरारीलाल पुत्र जयराम, श्याम सिंह पुत्र जयतु आदि के नाम भी दर्ज थे। इस पर उनके द्वारा खतौनी का रिकार्ड दुरुस्त करने के लिए तहसीलदार को पत्र दिया लेकिन राजस्व अधिकारियों में रिकार्ड में संशोधन नहीं किया। अलबत्ता फार्म (प) (क) 23 के आधार पर उनके मृत पिता नारायण दास का नाम भी खतौनी में इंद्राज कर दिया। इस पर राजीव, अनिल व सुनील ने डीएम को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की। इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने एसडीएम को जांच के आदेश दिए थे। मामले की जांच तहसीलदार जोगा सिंह को सौंपी गई। तहसीलदार ने खतौनी की सभी प्रविष्टियों की जांच कर अपनी रिपोर्ट एसडीएम सुंदर सिंह को सौंप दी है। रिपोर्ट में आपराधिक षड़यंत्र के तहत भू-अभिलेखों से छेड़छाड़ की संभावना जताई गई है।
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