एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने ट्रांजिट कैंप में चल रहे झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिकों पर छापे मारे। मौके पर मेडिकल सर्टिफिकेट न दिखाने पर 13 डॉक्टर पकड़े गए जबकि चार फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
छापेमारी की भनक लगते ही शहर के कई प्राइवेट क्लीनिकों के शटर गिर गए। पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से उनके मेडिकल सर्टिफिकेट मंगवाकर सरकारी डॉक्टर से जांच करवा रही है।
एसएसपी ने इलाज में लापरवाही से बच्चे की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश मातहतों को दिए।
शनिवार दोपहर इंस्पेक्टर अरविंद डंगवाल, थानाध्यक्ष ट्रांजिट कैंप सुशील कुमार, एसएसआई किच्छा योगेश उपाध्याय की अगुवाई में दो टीमों ने ट्रांजिट कैंप में छापेमारी की।
हर गली मोहल्लों में घूमकर टीमों ने प्राइवेट क्लीनिक और मेडिकल स्टोर संचालकों के अभिलेख जांचे। जितनी जगह भी छापे पड़े, वहां मौके पर मिला डॉक्टर और केमिस्ट डिग्री नहीं दिखा सका।
छापे की सूचना मिलते ही कई डॉक्टर अपना क्लीनिक बंद कर चलते बने। करीब डेढ़ घंटे तक चले छापामार अभियान में पुलिस मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं दिखाने वाले 18 प्राइवेट डॉक्टर, पांच मेडिकल संचालकों की दुकानें बंद करवाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इनमें राजकुमार, धर्मेंद्र, हरिचरन, गोलक ढाली, नरेंद्र, गोपाल विश्वास, प्रेमप्रकाश, महिपाल गंगवार, हिमालय सरकार, अश्वनी दास, संजय सरकार, लिटौक कृतनिका शामिल हैं। पुलिस ने छह अधखुले क्लीनिकों पर अपने ताले ठोंक दिए। उनके संचालकों की तलाश की जा रही है।
थानाध्यक्ष सुशील कुमार ने बताया कि हिरासत में लिए गए डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालकों से मेडिकल डिग्री मंगवाकर कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर किच्छा में तैनात डेंटल सर्जन डॉ. रवि भट्ट से जंचवाई जा रही हैं। जांच के बाद रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।