आतिशबाजी के बाजार में आई मंदी के कारण करीब 25 प्रतिशत पटाखा व्यवसायियों ने इस वर्ष अपने कारोबार को बंद कर दिया है। इसके चलते जिले भर में होने वाला पटाखों का कारोबार इस साल चार करोड़ के आसपास ही सिमटने की उम्मीद जताई जा रही है। रुद्रपुर में एफसीआई गोदाम के समीप लगने वाले पटाखा बाजार में भी दुकानों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
दीपावली पर लोगों द्वारा की जाने वाली आतिशबाजी से इस बार ऊधमसिंह नगर जिले के वातावरण को कुछ कम नुकसान होने के आसार लग रहे हैं। महीने का आखिर होने के कारण लोगों की जेबें ढीली हैं। इसके चलते लोगों द्वारा कुछ कम पटाखे खरीदने की उम्मीद जताई जा रही है। गदरपुर स्थित छाबड़ा एजेंसी पूरे उत्तराखंड में पटाखों की सप्लाई करती है। एजेंसी के मालिक देव छाबड़ा के अनुसार इस वर्ष पटाखा बाजार में मंदी छाई है।
इसके चलते करीब 25 प्रतिशत पटाखा कारोबारियों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। छाबड़ा के अनुसार बीते वर्ष पूरे जिले में करीब पांच करोड़ का पटाखा कारोबार हुआ था लेकिन इस वर्ष की स्थिति को देखते हुए इसके चार करोड़ पर ही सिमटने के आसार लग रहे हैं। कई दुकानदार सिर्फ इसलिए गोदामों से माल उठा रहे हैं कि उन्हें पिछले वर्ष के बचे हुए सामान को बेचने के लिए अनुमति चाहिए। रुद्रपुर के थोक व्यापारी नीटू सुखीजा के अनुसार भी इस बार के हालातों से पटाखा कारोबारियों के हाथ निराशा लग सकती हैं।
रुद्रपुर पटाखा एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद अनेजा के अनुसार पिछले वर्ष शहर में 220 पटाखों की दुकानें लगी थी, जिनसे सवा करोड़ के करीब पटाखों का कारोबार हुआ था। लेकिन इस वर्ष मात्र 140 दुकानदार ही पटाखों की दुकानें लगा रहे हैं, जिससे कारोबार के एक करोड़ तक पहुंचने के आसार भी कम ही हैं।