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नोटिस पर भड़के कोटेदार, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

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ज्ञानेंद्र शाही। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। पीडीएस गोदाम से दाल के उठान को लेकर डीएसओ और कोटेदार आमने-सामने आ गए हैं। कोटेदारों ने दाल का उठान नहीं होने के लिए डीएसओ को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि बाजार रेट से अधिक मूल्य पर दाल कार्डधारकों को बेची जा रही है। ऐसे में कार्डधारक दाल नहीं खरीद रहे हैं लेकिन डीएसओ ने उन्हें नोटिस देकर लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी दी है। कोटेदारों ने दुकानों का लाइसेंस निरस्त होने पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दे दी है।
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रुद्रपुर के 16 कोटेदारों ने पीडीएस गोदाम से चार माह से चने और मसूर की दाल का उठान नहीं किया था। ऐसे में दाल के सड़ने की आशंका जताई जा रही थी। दाल नहीं उठाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएसओ श्याम आर्या ने सभी कोटेदारों को नोटिस देकर जवाब मांगा था। चेतावनी दी थी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर राशन की दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। शुक्रवार को डीएसओ कार्यालय पहुंचे कोटेदारों ने नोटिस का विरोध किया।
उनका कहना था कि चने की साबुत दाल कार्डधारकों को 51 रुपये किलो और मसूर की दाल 51 रुपये किलो दी जा रही है। यही दाल बाजार में 48 से 50 रुपये किलो तक मिल रही है। सस्ता-गल्ला में दाल महंगी और गुणवत्ता खराब होने पर कार्डधारक ले नहीं रहे हैं। उन्होंने लाइसेंस निरस्त होने पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है। वहां नगर अध्यक्ष नरेश कुमार, मदन खन्ना, राजेंद्र शर्मा, अशोक कुमार, संदीप चावला, शांति मुक्ता आदि थे।
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दाल नहीं उठाने के नाम पर अधिकारी जबरन कोटेदारों का शोषण कर रहे हैं। अधिकारी खुद कुछ कोटेदारों से मिलीभगत कर राशन की कालाबाजारी करा रहे हैं। अधिकारियों की संपत्ति की जांच होनी चाहिए। - अवतार सिंह, केंद्रीय अध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति।
कोटेदारों का उत्पीड़न किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिना जांच पड़ताल के कोटेदारों को नोटिस देना सही नहीं है। कार्डधारक यदि दाल खरीदते तो गोदाम से कोटेदार भी दाल का उठान करते। - राजेंद्र बांगा, जिलाध्यक्ष राशनिंग डीलर वेलफेयर सोसायटी।
16 कोटेदारों में से किसी एक का भी लाइसेंस निरस्त हुआ तो आंदोलन की राह पकड़ी जाएगी। सामूहिक इस्तीफे से भी कोटेदार पीछे नहीं हटेंगे। जब कार्डधारक दाल खरीद ही नहीं रहे हैं तो ऐसे में हम क्या कर सकते हैं। - चंद्रपाल सिंह, कोटेदार।
गोदाम से दाल को उठाने के बाद उसे सस्ता-गल्ले के दुकान पर बेचना चुनौती से कम नहीं है। दुकानों से कार्डधारक दाल में खामियां बताकर उसे नहीं खरीद रहे हैं। ऐसे में हम लोगों पर दबाव बनाना बेमानी से कम नहीं है। - ज्ञानेंद्र शाही, कोटेदार।

चंद्रपाल सिंह।- फोटो : RUDRAPUR

राजेंद्र बांगा।- फोटो : RUDRAPUR

अवतार सिंह।- फोटो : RUDRAPUR

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