चुनावी पारा उफान पर है। गली, नुक्कड़, चाय की दुकान, पान का खोखा या फिर चाट का ठेला हर जगह लोगों की जुबां पर चुनाव की चर्चा है। लोग अपने हिसाब से प्रत्याशियों की हार जीत का गणित लगा रहे हैं। काशीपुर विधानसभा में 1, 51, 865 मतदाता हैं, जिनमें से करीब 40 हजार मुस्लिम वोटर हैं। लिहाजा सीट में हार जीत के लिए मुस्लिम वोटों की अहम भूमिका रहेगी। मोहल्ला अल्ली खां में ही अकेले करीब मुस्लिम 13 हजार वोटर हैं। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कांग्रेस की पकड़ अच्छी रही है।
लेकिन इन क्षेत्रों में बसपा की दस्तक ने कांग्रेस के माथे पर बल ला दिया है। कई घरों में बसपा के लहराते नीले झंडे मौजदूगी का अहसास कराते हैं। मुस्लिम इलाकों में भाजपा की चर्चा होती नहीं दिखाई पड़ती है, लेकिन पीस पार्टी, आरएलडी, निर्दलीय खड़े तीन मुस्लिम प्रत्याशियों की चर्चा कुछ जगहों पर सुनाई देती है। लेकिन इन प्रत्याशियों के प्रति कुछ खास रुझान नहीं दिखता है। वोटर साइलेंस दिखता है, इसलिए अनजान चेहरों के आगे मन की बात करने में गुरेज करता है। शुक्रवार को अमर उजाला ने मोहल्ला अल्ली खां में पहुंचकर मतदाताओं का मिजाज जानने की कोशिश की। अल्ली खां चौराहे पर ही कुछ लोग एक चाय की दुकान के बाहर कुर्सियां डाले चर्चा में मशगूल मिले।
अबरार अहमद कहते हैं कि कब्रिस्तान में गैबिया नाले का पानी भर जाता है। अब तक समस्या जस की तस है। वह खुद को कांग्रेसी बताते हुए कहते हैं कि पूरे क्षेत्र में कांग्रेस की लहर है। बुजुर्ग सरफराज कहते हैं कि मुस्लिम बस्तियों की उपेक्षा होती आई है लेकिन कांग्रेस मजबूत है। बसपा भी पैर जमा रही है। मोहम्मद तनवीर कहते हैं कि विधायक इस क्षेत्र में नहीं आते हैं। भाजपा का प्रचार वाहन तो क्षेत्र में घूम रहा है, लेकिन प्रत्याशी वोट मांगने नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस और बसपा ही दिख रही है। युवा शाहरुख और मोहम्मद रिजवान बोल पड़ते हैं कि बसपा का भी प्रचार है। लेकिन कह सकते हैं कि कांग्रेस को वोट मिलेंगे। सड़क के हालात खराब हैं। कमरुद्दीन कहते हैं कि घरों से सटकर 11 हजार केवी की लाइन गुजर रही है, कई हादसे होने के बाद भी हटाई नहीं जा सकी है। कांग्रेस के साथ बसपा को भी मुस्लिमों के वोट मिलेंगे। मतलूब कहते हैं कि अल्पसंख्यकों के लिए कांग्रेस ही काम करती है। इसलिए कांग्रेस को ज्यादा वोट मिलेंगे। बसपा भी वोट लाएगी।