सितारगंज के नयागांव स्थित प्राथमिक विद्यालय नकहा के हैंडपंप का पानी मिला दूषित। संवाद
सितारगंज। नयागांव में पीलिया और जलजनित रोगों की बढ़ती आशंकाओं के बीच पेयजल की गुणवत्ता पर चिंता बढ़ गई है। जल गुणवत्ता जांच में राजकीय प्राथमिक विद्यालय नकहा परिसर में लगे सार्वजनिक हैंडपंप के पानी में कोलीफॉर्म नामक बैक्टीरिया पाया गया है। इसके अलावा एक सार्वजनिक वाटर कूलर के पानी में भी बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट में दोनों स्रोतों के पानी को पीने योग्य नहीं माना गया है।
बीती चार जून को आईडीएसपी (इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम) ने प्रभावित इलाकों के विभिन्न पेयजल स्रोतों से सैंपल एकत्र किए थे। इन सैंपलों को टीम ने जांच के लिए जिला अस्पताल स्थित डीपीएसएल लैब में भेजा था। लैब में पानी के सैंपल को हाइड्रोजन सल्फाइड विधि के तहत 36 घंटे तक 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखकर जांच की गई। जांच में लैब विशेषज्ञों को पानी के सैंपल में कोलीफॉर्म नामक बैक्टीरिया मिला। सात जून को प्राप्त रिपोर्ट में नकहा स्थित सार्वजनिक हैंडपंप और वाटर कूलर के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि हुई है।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से इन जल स्रोतों के उपयोग पर रोक लगाने, उनकी सफाई और क्लोरिनेशन कराने तथा दोबारा सैंपल लेकर परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों से पानी को उबालकर या फिल्टर कर उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा किसी भी प्रकार के उल्टी, दस्त, बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है।
कहां से आती है कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी
सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पानी में मलजनित या अन्य जैविक प्रदूषण की आशंका है। इससे हेपेटाइटिस-ए, टाइफाइड, डायरिया, पेचिश और अन्य जलजनित रोग फैल सकते हैं। उनका कहना है कि ऐसे पानी का सेवन करने से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। विशेष रूप से विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर दूषित पेयजल गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है।