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शिक्षकों की हड़ताल से विद्यार्थी चिंतित

Fri, 26 Aug 2016 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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पंतनगर विश्वविद्यालय के हड़ताली शिक्षकों के प्रतिनिधियों एवं विश्वविद्यालय की प्रशासनिक समिति के बीच बने गतिरोध के कारण शिक्षकों की हड़ताल से विद्यार्थी चिंतित हैं। गौरतलब है कि 16 अगस्त से कार्य बहिष्कार कर रहे शिक्षकों के आंदोलन से पंतनगर विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप है। अनुसंधान और प्रसार कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
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देश के विख्यात कृषि विश्वविद्यालय के भविष्य को लेकर लोग चिंतित हैं। शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य का बहिष्कार किए जाने से अधिकांश विद्यार्थी घरों को जा चुके हैं। समस्या का कोई हल निकलता नहीं देखते हुए वे चिंतित हैं। जिन विद्यार्थियों की डिग्री पूरी होने वाली है। वे अधिक परेशान हैं। वे चाहते हैं कि जल्दी पढ़ाई शुरू हो और उनको समय पर डिग्री मिले। 

विद्यार्थियों के घर चले जाने के कारण व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी सन्नाटा सा छाया हुआ है। व्यापार मंडल अध्यक्ष अमन गाबा ने कहा कि प्रशासन और शिक्षकों को वार्ता का क्रम जारी रखना चाहिए। ताकि समस्याओं का समाधान हो सके। 
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इधर तीन दिन पहले राजभवन से कुलपति डॉ. मंगला राय का इस्तीफा अस्वीकार हो जाने पर विद्यार्थी खुश हैं। उनका कहना है कि कुलपति डॉ. मंगला राय ने छात्रावासों की दुर्दशा को सुधारा है। 

छात्रावासों को जाने वाली सड़कों का भी उद्धार किया है। कालेजों से टीचिंग पर्सनल व्यवस्था खत्म की है। रेगुलर शिक्षकों की नियुक्ति कर उन्हें शिक्षा हासिल करने के लिए नियमित शिक्षक दिए हैं। विद्यार्थी पठन-पाठन जारी कराने के लिए सोशल मीडिया का सहारा भी ले रहे हैं। 
इस बीच कुलपति इस्तीफा देने के दिन से ही लगातार सरकारी कार्यों का निस्तारण करते रहे हैं। इस्तीफा मंजूर न होने की वजह से वह अब वह पंतनगर में ही रहेंगे।

उधर, पंतनगर शिक्षक समिति के अध्यक्ष डॉ.पीएन सिंह ने बताया कि समिति ने बीती रात तराई भवन में कुलपति को पत्र भेजकर अपनी बात से अवगत करा दिया है। उनकी मांग है कि कुलपति निदेशक विधि का त्याग पत्र स्वीकार करें। अपने स्तर की मांगों का निस्तारण करें और शासन स्तर पर पैरवी करने के लिए बनाई जाने वाली समितियों में शिक्षक समिति के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। 

इस बीच समिति की तरफ से अखबारों में रखकर परिसर में बिना प्रेस लाइन के पर्चे बांटे गए हैं। पर्चों आरोप लगाया गया है कि कुलपति के दावों के विपरीत कालोनियों और छात्रावासों में यूनिवर्सिटी डेयरी का दूध जरूरत के अनुरूप नहीं मिल रहा है। परिसर की सड़कों की हालत खराब है। सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों जैसे बीएससी फूड टेक्नोलॉजी और एमबीए की फीस बहुत अधिक है। 

इन पाठ्यक्रमों से संबंधित नियमित शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मानदेय न दिए जाने की सलाह दी गई है। पत्र में लिखा है कि कुछ शिक्षक विद्यार्थियों को बहका रहे हैं। विद्यार्थियों से उनकी बातों में न आने की अपील की गई है। शिक्षकों का मानना है कि यदि कुलपति हड़ताली शिक्षकों से सीधे बात कर लें तो गतिरोध खत्म हो सकता है। इस तरह कोई बीच का रास्ता भी निकल सकता है।
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