हमारे धर्म, कर्म संस्कारों में रची बसी गंगा को निर्मल करने की न जाने कितनी बार योजनाएं बनी, अरबों रुपए खर्च हो गए, लेकिन गंगा मैली की मैली है। जब तक गंगा में शहरों, कस्बों का सीवर, कारखानों का प्रदूषित पानी मिलता रहेगा तब तक गंगा कोनिर्मल बनाने के दावे जनता को भ्रम में रखना है। काशीपुर शहर का सीवर ढेला नदी से रामगंगा में मिलता है। जो आगे जाकर गंगा में मिलकर निर्मल गंगा योजनाओं को ठेंगा दिखा रही है।
यूपी के मुख्यमंत्री रहते नारायण दत्त तिवारी ने लगभग 40 साल पहले शहर में सीवर लाइन बिछवाई थी। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा था। इसी दौरान तिवारी सरकार हट गई। बाद में सीवर को सीधे ढेला नदी में छोड़ा जाने लगा। तिवारी के उत्तराखंड के मुख्यमंत्री काल में फिर सीवर ट्रीटमेंट लगाने का काम शुरू किया गया था, जोउनके कार्यकाल तक पूरा नहीं हो सका। फिर बाद की सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब भी सीवर सीधे ढेला नदी छोड़ा जाता है। यही ढेला आगे जाकर रामगंगा में मिल जाती है। रामगंगा आगे चल कर गंगा में समा जाती हैं।