मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने मंगलवार को खटीमा में 38वें राष्ट्रीय खेलों की मलखंभ प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। स्पर्धा का शुभारंभ करने के बाद सीएम ने कहा कि देवभूमि को अब खेलभूमि के नाम से भी जाना जाएगा। इसी उद्देश्य से इस बार के प्रदेश में नेशनल गेम्स का आयोजन हो रहा है। इससे प्रदेश का स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत हुआ है।
खटीमा के चकरपुर स्थित वन चेतना केंद्र स्पोर्ट्स स्टेडियम में पहुंचने पर सीएम धामी का जोरदार स्वागत किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ करने के बाद सीएम ने कहा कि मलखंब केवल खेल नहीं, बल्कि शारीरिक दक्षता, मानसिक एकाग्रता, संतुलन और आत्मसंयम का अद्भुत संगम है। यह भारत की एक ऐसी प्राचीन विरासत है, जिसे संजोकर रखना हम सभी का कर्तव्य है।
कहा कि मलखंब खेल योग, कुश्ती और जिम्नास्टिक का एक ऐसा अद्भुत मिश्रण है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को साधने की अद्वितीय क्षमता है। यही कारण है कि आधुनिक खेलों के बीच भी इसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान बनी हुई है। प्रदेश सरकार प्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए भविष्य में भी इसी प्रकार कार्य करती रहेगी।
इस दौरान मलखंब एसोसिएशन उत्तराखंड के सचिव रमेश चंद्र ओली, डीओसी मलखंब नैनपाल, राज्य ओलंपिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. डीके सिंह, पालिकाध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, रुद्रपुर मेयर विकास शर्मा, डीएम नितिन भदौरिया, एसएसपी मणिकांत मिश्रा, जिला क्रीड़ाअधिकारी जानकी कार्की आदि मौजूद थे।
स्वर्ण पदक विजेता कपिल को किया सम्मानित
ओलंपिक मेजबानी के लिए भेजे प्रस्ताव में पारंपरिक खेलों को शामिल करने का प्रयास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत के पारंपरिक खेलों को न केवल सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा है, बल्कि उन्हें वैश्विक पहचान भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भेजे गए प्रस्ताव में देश के पारंपरिक खेलों कबड्डी, खो-खो और योग आदि को ओलंपिक में शामिल करने के भी प्रयास किए हैं।
चकरपुर स्टेडियम में खुलेगी बोर्डिंग बॉक्सिंग अकादमी