सितारगंज। नगर के सौंदर्यीकरण को लेकर सड़कों के चौड़ीकरण के लिए हटाए जाने वाले अतिक्रमण पर प्रशासन की कार्रवाई शुरू हो गई है। इसके विरोध में व्यापारियों ने कोतवाली गेट पर नारेबाजी कर धरना दिया। पुलिस और व्यापारियों के बीच नोकझोंक हुई। करीब दो घंटे के सांकेतिक धरने के बाद एडीएम के समक्ष व्यापारियों ने अपना पक्ष रखा। एडीएम ने दोहरा मापदंड न अपनाने का आश्वासन दिया। बाद में प्रशासन ने पांच लोगों को नजरबंद कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। जेलकैंप मार्ग पर जेसीबी चली और करीब सौ दुकानों और भवनों का अतिक्रमण हटाया गया।
शनिवार सुबह नौ बजे से नगर के मुख्य बाजार में पुलिस फोर्स तैनात हो गई थी। 10 बजे व्यापारी एकत्र होकर मुख्य चौराहा पहुंचे और फिर करीब 11 बजे व्यापारियों ने कोतवाली गेट पर धरना शुरू कर दिया। व्यापारियों ने कहा कि सौंदर्यीकरण का कार्य महाराणा प्रताप चौराहा से बमनपुरी तिराहा तक होना है, जिसकी डीपीआर टेंडर में भी है। खटीमा मार्ग मध्य से 60 फुट, किच्छा मार्ग मध्य से 41 फुट और जेलकैंप मार्ग 36 फुट है। जब उन्हें 30 फुट करके रियायत दी गई तो जेलकैंप के व्यापारियों को भी रियायत मिलनी चाहिए। धरने की सूचना पर संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार व सीओ सुरजीत कुमार कोतवाली पहुंचे और व्यापारियों के शिष्टमंडल से वार्ता की लेकिन मामला नहीं सुलझा।
इस पर एडीएम जगदीश चंद्र कांडपाल, एसपी सिटी देवेंद्र पींचा और खटीमा एसडीएम निर्मला बिष्ट कोतवाली पहुंचे। दोबारा करीब आधा घंटे तक वार्ता में व्यापारियों ने अपना पक्ष रखा। एडीएम ने कहा कि नगर के तीनों मार्गों को दोनों तरफ से 30-30 फुट खाली कराया जाना है। दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाएगा। इसके बाद प्रशासन ने व्यापारी नेता इकशाद पटौदी, नवतेज पाल सिंह, हरपाल सिंह, मुख्त्यार अंसारी व रवि रस्तोगी को नजरबंद कर अभियान शुरू किया गया। वहीं, कई व्यापारियों ने भी खुद ही अपना अतिक्रमण तोड़ना शुरू कर दिया। एसडीओ विद्याभूषण जोशी ने बताया कि दोपहर एक बजे से जैसे ही अभियान शुरू किया गया, तो ऐहतियातन नगर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी। शाम छह बजे अतिक्रमण अभियान थमने के बाद आपूर्ति बहाल की गई।
प्रशासन ने किच्छा और खटीमा मार्ग पर भी अतिक्रमण चिह्नित कर लाल निशान लगाए। भूमि अध्याप्ति अधिकारी नरेश चंद्र दुर्गापाल ने बताया कि पांच फरवरी तक सारा अतिक्रमण हटाया जाना है। रविवार को भी अभियान चलेगा। वहां पालिकाध्यक्ष हरीश दुबे, रामनगीना प्रसाद पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष शंकर दत्त जोशी, व्यापार मंडल अध्यक्ष राकेश गोगना, रजत मित्तल, नरेंद्र सिंह, अबरार अहमद, संदीप बावा, मुख्त्यार अंसारी, जावेद मलिक, पूरन चौहान, जावेद सिद्दीकी, परवेज पटौदी आदि थे।
अतिक्रमण हटाने के दौरान मुर्गा व्यवसायी को दौरा पड़ा
सितारगंज। प्रशासन ने जैसे ही टीचर कॉलोनी के पास से अतिक्रमण हटाने के लिए मुर्गा व्यवसायियों के खोखे हटाए और पक्के अतिक्रमण ध्वस्त करने के लिए जेसीबी गरजी तो मुर्गा व्यवसायी रियासत खान (पिंटू) को दौरा पड़ गया। जुबां दांतों के बीच में आकर कटने से वह बुरी तरह लहूलुहान हो गए। आसपास के लोग तुरंत ही उन्हें निजी अस्पताल ले गए, जहां उनका इलाज चल रहा है। संवाद
7.73 करोड़ से होना है सौंदर्यीकरण काम
सितारगंज। लोनिवि के जेई सतपाल सिंह ने बताया कि नगर के सौंदर्यीकरण का काम 7.73 करोड़ रुपये से पूरा होना है। अतिक्रमण के कारण कार्य अधूरा पड़ा है, जिसे अब मार्च तक पूरा किया जाना है। इसमें 4.64 करोड़ की लागत से महाराणा प्रताप चौक से बमनपुरी तिराहा और 3.09 करोड़ की लागत से नगर के मुख्य बाजार में सड़कें आदि कार्य किए जाने हैं। हाईकोर्ट में एडवोकेट दयानंद सिंह, अबरार अहमद, जावेद मलिक और राकेश गोगना की याचिका विचाराधीन है। इस वजह से अभी वहां का अतिक्रमण हटाने के आदेश नहीं हैं।
छावनी में बदल गया सितारगंज
सितारगंज। जेलकैंप मार्ग पर अतिक्रमण विवाद से निपटने के लिए प्रशासन ने भारी इंतजाम किए थे। एसपी सिटी देवेंद्र पींचा के नेतृत्व में सीओ सुरजीत कुमार, कोतवाल सलाहउद्दीन के अलावा 14 दरोगा, 20 कांस्टेबल, चार महिला कांस्टेबल, एक प्लाटून महिला पीएसी व एक प्लाटून पुरुष पीएसी को तैनात किया गया था। इसके अलावा एडीएम जगदीश चंद्र, भूमि अध्याप्ति अधिकारी नरेश चंद्र दुर्गापाल, खटीमा एसडीएम निर्मला बिष्ट के लोनिवि के एई प्रमोद सुयाल, आलोक कुमार ओली, केसी भट्ट, कनिष्ठ अभियंता सतपाल सिंह, नीरज कुमार और राजस्व उप निरीक्षकों को तैनात किया गया था। संवाद
योजना बदलकर भ्रष्टाचार को मिटाना चाहता है प्रशासन
सितारगंज। पूर्व विधायक नारायण पाल ने नगर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान पर नाराजगी जताई। पाल ने कहा कि तहसीलदार से लेकर सीएम तक से बात की थी। जहां परियोजना का पैसा स्वीकृत किया था, वहां काम न कर अपने भ्रष्टाचार और लापरवाही को मिटाने के लिए विभाग गरीबों को उजाड़ रहा है। जिला प्रशासन ने कोई अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। सीएम, मुख्य सचिव, कमिश्नर और डीएम से भी बात की थी लेकिन शासन-प्रशासन ने गरीबों के साथ न्याय नहीं किया। दमनकारी भाजपा सरकार जनता को कुचलने का काम कर रही है। गरीब व्यवसायियों के चेहरों की मायूसी पर भी तरस नहीं आया। जनता इसका जवाब 2022 के चुनाव में देगी।