खटीमा के मेलाघाट स्थित नेपाल सीमा पर वन भूमि पर हो रहे प्लांटेशन पर किए गए क्षतिग्रस्त पोल। संवाद
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खटीमा। नेपाल से लगी भारतीय सीमा पर खटीमा वन विभाग की ओर से कराई जा रही तारबाड़ को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इसका आरोप नेपाल के नागरिकों पर लगा है। वन क्षेत्राधिकारी आरएस मनराल ने तारबाड़ क्षतिग्रस्त करने और प्लांटेशन करने का नेपाल की ओर से विरोध किए जाने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी है।
खटीमा वन रेंज की ओर से 25 हेक्टेयर भूमि पर लगभग एक हजार से अधिक पिलर लगाकर उसमें तारबाड़ लगाने की योजना थी। नेपाली नागरिकों ने इस स्थान को नेपाल का बताकर यहां लगे पिलर क्षतिग्रस्त कर दिए। मौके पर पहुंचे नेपाल आर्मी पुलिस फोर्स स्थिति देखने के बाद चली गई। यह घटना दो जून की रात की बताई जा रही है। नेपाली नागरिकों की ओर से इस भूखंड को नेपाल का बताए जाने से प्लांटेशन का कार्य स्थगित हो गया है।
वन विभाग ने अपनी भूमि पर किए जा रहे प्लांटेशन का विरोध करने वाले नेपाली नागरिकों के साथ ही एमाले गुट के समर्थक बताए हैं। इधर नेपाल से लगी भारतीय सीमा पर किए जा रहे प्लांटेशन वाले स्थान का बॉर्डर पर तैनात एसएसबी और गुप्तचर एजेंसियां भी जायजा ले चुकी हैं जो इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजेंगी।
इंडो-नेपाल सीमा के पिलर संख्या 14 के नो मैंस लैंड के बाद काफी अंदर लगाए जा रहे प्लांटेशन का नेपाल की ओर से किए जा रहे विरोध की स्थिति से उच्चाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उच्चाधिकारियों के निर्देशन के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव है। फिलहाल प्लांटेशन का काम स्थगित है।
- राजेंद्र सिंह मनराल, वनक्षेत्राधिकारी खटीमा रेंज।
प्लांटेशन के विरोध की कोई जानकारी नहीं है। इंडो-नेपाल सीमा पर ऐसा विवाद होता है तो उसकी सूचना हमारे मित्र राष्ट्र नेपाल के उच्चाधिकारियों को देकर उन्हें स्थिति से अवगत कराएंगे ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत हो और स्थिति स्पष्ट हो सकें। यदि स्वार्थी तत्वों की ओर से शरारत की जा रही है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल वन विभाग के उच्चाधिकारियों से भी ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है।
-युगल किशोर पंत, डीएम ऊधम सिंह नगर।