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किसानों को इंसाफ के लिए सांकेतिक उपवास पर बैठे पाल

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मुनासिब दाम नहीं मिलने पर केले की फसल को ट्रैक्टर चलाकर रौंदने वाले किसान को न्याय दिलाने के लिए पूर्व विधायक नारायण पाल आगे आए हैं। पूर्व विधायक ने किसानों के साथ खुनसरिया गांव में सांकेतिक उपवास पर बैठकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। उन्होंने पीड़ित किसानों का मुआवजा देने की मांग की। इस दौरान उन्होंने सरकार के तीनों कृषि कानूनों का भी विरोध जताते हुए नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
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मंगलवार को ग्राम खुनसरिया गांव में किसान शेर सिंह और उनके भाइयों राजेश कुमार और रमेश कुमार के चार एकड़ में लगी केले की फसल को जोतने की घटना को लेकर पूर्व विधायक पाल किसानों के साथ गांव में उपवास पर बैठे। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत उद्यान विभाग की ओर से 1500 केले के पौधे दिए गए और मजदूरी देने एवं अच्छे मूल्य की बात कही गई थी। किसानों ने भी करीब सात लाख रुपये खर्च किए।
केले की फसल तैयार होने पर जब किसान बाजार में केला बेचने गए तो उनकी फसल को सिर्फ 50 हजार कीमत मिली। उन्होंने बाजार में केला न बेचकर चार एकड़ में लगी फसल को जोत डाला।
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पाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से वार्ता की। रावत ने घटना को गंभीरता से लेते हुए देहरादून में उपवास पर बैठने की बात कही है। आरोप लगाया कि कृषि एवं उद्यान विभाग उक्त किसानों की ओर से फसल जोतने की घटना के बाद से बात करने से कतरा रहा है। उन्होंने तीनों किसानों के साथ इंसाफ करने की मांग की। वहां पूर्व प्रधान हरीराम, आनंद सिंह राणा, भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष गुरसाहब सिंह गिल, लखन सिंह यादव, प्यारे लाल यादव, पिंकू यादव, राजपाल यादव, गुरुचरण सिंह, दौलतराम सागर आदि थे।
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