तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से अधिक समय तक चले किसान आंदोलन में ऊधमसिंह नगर जिले के किसानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। किसान आंदोलन के दौरान यूपी के लखीमपुर में रुद्रपुर के किसान नेता तजिंदर विर्क बुरी तरह घायल हो गए थे।
उत्तराखंड में किसान आंदोलन की चिंगारी भी रुद्रपुर से ही उठी थी। राज्य में ऊधमसिंह नगर ही किसान आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा था। केंद्र सरकार की ओर से किसानों की मांगें माने जाने को किसानों ने ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि किसानों की शहादत और संघर्ष से ही यह संभव हो सका।
किसानों की मांगों के आगे आखिर केंद्र सरकार को झुकना ही पड़ा। यह किसानों के संघर्ष की जीत है। किसान आंदोलन में देश के 700 से अधिक किसानों ने शहादत दी। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की शहादत को हमारा देश कभी नहीं भूलेगा।
- तजिंदर विर्क, राष्ट्रीय अध्यक्ष, तराई किसान संगठन।
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तीनों कृषि कानूनों को वापस लेकर केंद्र सरकार ने देश के किसानों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। आज देश का किसान सरकार से संतुष्ट है। किसान आंदोलन को खत्म करने का एलान कर किसानों ने सरकार का आभार जताया है।
-कुंवरपाल दहिया, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ।
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देश की आजादी के बाद यह आर्थिक गुलामी के खिलाफ बड़ी जीत है। किसान आंदोलन जनआंदोलन था, जिसमें किसानों के साथ ही आम जनता ने भी अपनी सहभागिता निभाई। यह किसानों की सबसे बड़ी जीत है। - विक्रमजीत सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाकियू (चढूनी)।
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किसानों की मांग पूरी करने के लिए हम सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देते हैं। किसानों की शहादत से ही आज किसान आंदोलन सफल रहा और सरकार को किसानों के आगे झुकना पड़ा।
-सुखेदव सिंह, जिला उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा।
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किसानों की तपस्या और शहादत की बदौलत ही केंद्र सरकार को किसानों की मांग को मानने पर मजबूर होना पड़ा। आंदोलन में दिनेशपुर क्षेत्र से भी किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी किसानों को बधाई और मांग को स्वीकार करने के लिए केंद्र सरकार का भी आभार। -डॉ. कुलवंत सिंह विर्क,, संयोजक तराई किसान संगठन दिनेशपुर क्षेत्र
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आंदोलन में युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। एक साल तक चले आंदोलन में किसानों का मनोबल कभी नहीं टूटा। आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानो की कुर्बानी की बदौलत केंद्र सरकार को किसानों के आगे झुकना पड़ा। यदि यही निर्णय केंद्र सरकार एक साल पहले ले लेती तो 700 किसान शहीद होने से बच जाते। फिलहाल किसानों की मांगों को मानने के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद।
-हरपाल सिंह मनेश, प्रदेश सचिव, तराई किसान संगठन उत्तराखंड।
देश के किसान, मजदूरों के संघर्ष और शहादतों की जीत : बाजवा
बाजपुर। संयुक्त किसान मोर्चा गाजीपुर बॉर्डर के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद किसान आंदोलन अपने मुकाम तक पहुंच गया है। संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव पर चर्चा कर संयुक्त किसान मोर्चा ने बॉर्डर खाली करने की घोषणा कर दी है।
बाजवा ने कहा कि भारत सरकार के सचिव संजय अग्रवाल के माध्यम से भेजे गए प्रस्ताव में एमएसपी के संबंध में कमेटी बनाने, तत्काल प्रभाव से आंदोलनकारियों से मुकदमे रद्द करने, मुआवजे पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। बिजली बिल के संबंध में आश्वासन दिया गया है कि बिजली बिल सदन में पेश करने से पूर्व संयुक्त किसान मोर्चा के साथ चर्चा की जाएगी।
सभी बिंदुओं पर विचार विमर्श कर संयुक्त किसान मोर्चा ने निर्णय लिया कि 11 दिसंबर को सभी किसान, मजदूर देशभर में विजय दिवस मनाते हुए बॉर्डर को खाली करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इस दौरान बॉर्डर पर सीडीएस बिपिन रावत और उनके साथियों की शहादत को नमन कर संयुक्त किसान मोर्चा ने गहरा शोक व्यक्त किया। साथ ही 10 दिसंबर तक कोई भी जश्न या खुशी नहीं मनाने का निर्णय लेते हुए अपने आप को देश की संवेदना के साथ जोड़ा है।
‘किसानों के मजबूत इरादों से मंजिल हुई आसान’
काशीपुर। किसान नेताओं ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद किसानों को जीत हासिल हुई है।
भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता ने कहा कि किसानों ने परेशानियां उठाकर कड़े संघर्ष के बाद जीत हासिल की है। यह किसानों के मजबूत और कुशल नेतृत्व से ही संभव हो सका है। किसानों की जायज मांगों को जनता का भी समर्थन मिला है। भाकियू (युवा) विंग्स के प्रदेश प्रवक्ता मनप्रीत सिंह ने कहा कि किसानों का आंदोलन काफी कष्टमय रहा।
इस दौरान किसानों को हतोत्साहित करने के भी तमाम प्रयास किए गए। संघर्ष से मिली जीत के बाद किसान सारे दुख भूल चुके हैं। कांग्रेस नेत्री इंदु मान ने कहा कि किसानों ने एक साल तक आंदोलन जारी रखा, इस पर केंद्र सरकार को तीनों काले कानून वापस लेने पड़े। एमएसपी, मुआवजे और किसानों पर हुए झूठे मुकदमें वापस लेने का आश्वासन देना पड़ा।
सुखेदव सिंह, जिला उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा।- फोटो : RUDRAPUR
विक्रमजीत सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाकियू (चढूनी)।- फोटो : RUDRAPUR
कुंवरपाल दहिया, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ।- फोटो : RUDRAPUR
तजिंदर विर्क, राष्ट्रीय अध्यक्ष, तराई किसान संगठन।- फोटो : RUDRAPUR