गदरपुर। एक तरफ प्रदेश सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान चलाकर बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ बेटियां सरकारी की नीतियों से खुद को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। वर्ष 2017 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को नंदा गौरा योजना के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाली 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के स्थान पर अब मात्र पांच हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। जिससे उनमें निराशा है।
इंटरमीडिएट में पास होने के बाद खुशी थी कि सरकार से प्रोत्साहन राशि मिलेगी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद मात्र 5 हजार रुपये की राशि खाते में आई है, जबकि 51 हजार रुपये देने की बात की जा रही थी।
- हिमांशी, चमनगंज
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सरकार ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा तो दिया लेकिन बेटियों के मनोबल को कमजोर करते हुए उनको मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के वितरण में भेदभाव किया है, जो गलत है। - पिंकी साना, सुखशांतिनगर
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हमने इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन सरकार ने वादाखिलाफी की और योजना के अंतर्गत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से अब तक वंचित रखा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
- रुपिंदर कौर, गुरुनानक पुर
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चार साल पहले समाज कल्याण विभाग में आवेदन पत्र जमा किए थे। बाद में पता चला कि वह बाल विकास में जमा हैं, लेकिन अभी तक योजना के अंतर्गत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
- रबीना, खेमपुर
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नए शासनादेश में आवेदक के साथ माता-पता के आधार कार्ड और पैन कार्ड भी जमा करने के लिए कहा गया है, जिसके लिए समय बहुत कम रखा गया है। जो आवेदन पूर्व में जमा हैं, उसी आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाए।
- करिश्मा, इंद्रा कालोनी दौलतगंज
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योजना के लाभ से वंचित छात्राओं से आवेदन पत्र जमा कराए गए हैं। शासनादेश के अनुसार पूर्व में जिन छात्राओं ने आवेदन जमा करे थे, उनको निर्धारित प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई है।
- गीता जोशी, सीडीपीओ, गदरपुर
रवीना।- फोटो : RUDRAPUR
रुपिंदर कौर।- फोटो : RUDRAPUR
पिंकी साना।- फोटो : RUDRAPUR
हिमांशी डोगरा।- फोटो : RUDRAPUR