नगर में 24 आधे-अधूरे शौचालय का निर्माण कराने वाली कंपनी अब 30 लाख का भुगतान मांग रही है। जबकि कंपनी ने शौचालय का निर्माण बिना टेंडर के किया है। चार साल बाद निगम के अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो वे भुगतान से हाथ खड़े कर रहे हैं।
नगर निगम ने वर्ष 2017 में एक कंपनी से बिना टेंडर के वर्क आर्डर पर द्रोणासागर के बाहर शौचालय निर्माण कराने को कहा। इसी तरह रामनगर रोड पर स्टेडियम, डिजायन सेंटर, चीनी फैक्ट्री, आवास विकास आदि में भी शौचालयों का निर्माण कराने को कहा गया। एक भवन में औसतन पांच सीटों का निर्माण कराया गया। यह सीटें वायोफीट की हैं।
इसमें प्लाई के दरवाजे लगाए गए हैं। कमरों के ऊपर रखे गए टैंक काफी छोटे हैं। कमरे भी काफी छोटे हैं। शौचालयों में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। बताया जा रहा है कि काम पूरा किए बिना कंपनी फरार हो गई। नगर निगम ने बिना टेंडर निकाले कंपनी को काम दे दिया। कंपनी प्रति सीट एक लाख 25 हजार रुपये भुगतान मांग रही है जो तीस लाख से अधिक है। जबकि नगर निगम एक शौचालय 15 हजार से भी कम में बनाता आया है।
बताया जाता है कि अब कंपनी के अधिकारी भुगतान लेने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि एक कंपनी ने बिना टेंडर के शौचालयों का अधूरा निर्माण किया। मामला संज्ञान में आया है, जो शौचालय बने हैं, वह भी अधूरे हैं। टूटे हुए भी हैं। निगम प्रशासन इस मामले की जांच कर रहा है। यह मामला अब चर्चा में है।
लोगों का कहना है कि बिना निगम के किसी अधिकारी की मिलीभगत के इस तरह का काम नहीं हो सकता है। इन अधूरे शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है, राहगीर बिना पानी के ही उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह गंदगी से पट गए हैं। इनसे दुर्गंध आती है। आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम ने इस तरह के किसी भी शौचालय के निर्माण का टेंडर नहीं निकाला है। इस तरह का कोई ऑर्डर भी नहीं दिया गया है। भुगतान के लिए मुझसे कोई नहीं मिला है। जब निगम ने कार्य आदेश ही नहीं किया तो कंपनी भुगतान कैसे मांगेगी। - विवेक राय, नगर आयुक्त, नगर निगम काशीपुर।
विवेक रॉय।- फोटो : KASHIPUR