नाबार्ड की ओर से किसानों को कृषि ऋण की सुविधा देने के बाद भी अधिकांश किसान इसका लाभ नहीं उठा रहे हैं। जिसके चलते इस वर्ष प्रदेश में मात्र आठ हजार करोड़ रुपये का ही कृषि ऋण वितरित हो सका। नाबार्ड के अधिकारियों ने आय बढ़ाने के लिए किसानों को बैंकों से कृषि ऋण लेने का सुझाव दिया।
शनिवार को रुद्रपुर रोड स्थित होटल में राष्ट्रीय कृषि विकास बैंक (नाबार्ड) ने क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों और कृषि पर आधारित उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में बैंक के मुख्य प्रबंधक डॉ. ज्ञानेंद्र मणि ने बताया कि ग्रामीण बैंकों को किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को ऋण देने का लक्ष्य दिया जाता है। किसानों को कृषि विकास योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए लेकिन उत्तराखंड में कृषि ऋण लेने वालों की संख्या अपेक्षा से कम है जबकि टर्मलोन की स्थिति ठीक है।
पूरे राज्य में कुल 8 हजार करोड़ रुपये का ही ऋण वितरित हुआ है। उद्यान एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के निदेशक डॉ. सी तिवारी ने बताया कि कृषि आय को बढ़ाने के लिए सहकारी और ग्रामीण बैक की ऋण योजनाओं का लाभ पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, डेयरी उद्योग लगाने में किया जा सकता है।
बताया कि किसानों को कृषि उत्पादन समूह बना कर उसके माध्यम से अपने उत्पादों को थोक में बेचने चाहिए। थोक में ही दवा, बीज आदि की खरीद करनी चाहिए। इसमें बैंक भी उन्हें सहयोग करेंगे। किसानों को बागवानी के लिए भी बैंकों का सहयोग लेना चाहिए। बैठक में डॉ. राजीव प्रियदर्शी, अरुण भक्कू, नवनीत रावल, राजेश गुप्ता, सुनील मेहरा, दीपक आदि थे।
नाबार्ड ने राज्य सरकार को दिया है 92 हजार करोड़
काशीपुर। नाबार्ड के मुख्य प्रबंधक डॉ. ज्ञानेंद्र मणि ने बताया कि बैंक ने उत्तराखंड सरकार को बिजली, पानी और सड़क के लिए 92 हजार करोड़ रुपये दिए हैं। कोविड काल में कई किसान ऋण वापस नहीं कर पाए। जिससे ग्रामीण बैंकों की हालत खराब हो गई। इस पर नाबार्ड ने सहकारी और ग्रामीण बैंकों को 25 हजार करोड़ रुपये दिए और किसानों से अगस्त तक ऋण वसूली न करने के लिए कहा। बैंक और सहकारी समितियां किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से तीन लाख रुपये तक का ऋण देते हैं।