रुद्रपुर। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने बैंक लोन मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी की याचिका खारिज कर दिया। न्यायालय ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा और अर्थदंड को बरकरार रखा। आरोपी की ओर से बीमारी का हवाला और चेक को सुरक्षा के लिए दिया गया बताने का पैंतरा भी अदालत में काम नहीं आया। कोर्ट ने माना कि इन बातों से कानूनी दायित्व समाप्त नहीं हो जाता है।
मुरादाबाद निवासी सुजीत कुमार ने एचडीएफसी बैंक की रुद्रपुर शाखा से किसान गोल्ड लोन योजना के तहत ऋण लिया था। ऋण की अदायगी के लिए उसने बैंक को 3.15 लाख का चेक दिया, लेकिन बैंक में पेश करने पर वह बाउंस हो गया। बैंक ने नियमानुसार कानूनी कार्रवाई शुरू की। मामले में निचली अदालत ने आरोपी को छह माह के साधारण कारावास और 4.95 लाख के अर्थदंड दिया था। जिसके खिलाफ आरोपी ने तृतीय अपर सत्र अदालत में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान आरोपी ने तर्क दिया कि संबंधित चेक सिर्फ सुरक्षा (सिक्योरिटी) के उद्देश्य से दिया गया था जिसका गलत उपयोग किया गया। उसने खुद को कैंसर पीड़ित बताते हुए राहत देने की मांग भी की थी। हालांकि आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायाधीश ने कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार होने की स्थिति में कानून के तहत देनदारी का अनुमान आरोपी के विरुद्ध जाता है, जिसे वह विश्वसनीय साक्ष्यों से खंडित करने में असफल रहा। इसके आधार पर आरोपी की अपील निरस्त कर दी गई।