राधेहरि राजकीय महाविद्यालय के पुस्तकालय में मंगाई गई पुस्तकों में घपले की जांच के बाद भी मामला शांत होता नहीं दिख रहा। जांच कमेटी से भौतिकी के विभागाध्यक्ष के हट जाने के बाद प्राचार्य ने अब जांच कमेटी के एक सदस्य से पुस्तकालय का प्रभार छीन लिया है। प्राचार्य ने बताया कि जांच रिपोर्ट चार दिसंबर को खोली जाएगी।
लाइब्रेरी में मंगाई गई पुस्तकों में घपले की जांच के लिए छात्र नेताओं के आंदोलन के बाद प्राचार्य डॉ. एएस सिराड़ी ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। बताया जा रहा है कि समिति के सदस्य चार दिन तक प्राचार्य से खरीद से जुड़े प्रपत्र मांगते रहे, लेकिन प्राचार्य ने किताबों की संख्या के अलावा कुछ उपलब्ध नहीं कराया। प्राचार्य द्वारा जांच में सहयोग न करने पर भौतिकी के विभागाध्यक्ष डॉ. डीआर मिश्रा ने जांच समिति से खुद को अलग कर लिया था। शेष सदस्यों ने कालिख पुती और मूल्य अंकित पुस्तकों की गिनती कर जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों की संख्या उपलब्ध कराए गए विवरण से लगभग आधी है।
जांच रिपोर्ट देने के बाद पुस्तकालय प्रभारी ने अगस्त में मंगाई गई पुस्तकें सील करने की बात प्राचार्य के समक्ष रखी। उनका कहना था कि साक्ष्य मिटाने के लिए मूल्य पर कालिख पुती पुस्तकों को क्षति पहुंचाई जा सकती है। जांच का परिणाम सार्वजनिक होने पर इन्हें सीलबंद कर सुरक्षित रखा जाए। लाइब्रेरी से यदि ये पुस्तकें खुर्द-बुर्द होती हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। प्राचार्य ने उक्त पुस्तकें सील करने से इनकार कर दिया। इस पर पुस्तकालय प्रभारी सुभाष चंद्र कुशवाहा ने उन्हें पुस्तकालय की जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया।
इधर, प्राचार्य डॉ. सिराड़ी ने बताया कि डॉ. कुशवाहा से प्रभार लेकर सहायक प्राध्यापक उदय कुमार को दे दिया गया है। कहा, जांच समिति की जांच रिपोर्ट चार जनवरी को सार्वजनिक की जाएगी। कुछ किताबें आना अभी बाकी है। पुस्तक विक्रेता से इन किताबों की आपूर्ति जल्द करने को कहा गया है।