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सुनिहा अरज छठी मैया, बढ़े कुल परिवार

Thu, 15 Nov 2018 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
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काशीपुर में द्रोणा सागर स्थित कुंड में छठ पूजन करते लोग। - फोटो : amar ujala
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कांचहि बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए..., केरवाज फरेला घवद से ओह पर सुग्गा मेडराए, हमहूं अरघिया देबई हे छठी मइया, केलवा के पात पर उगेलन सुरुजदेव..., सेविले चरण तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहर अपार..., आस्था की गहराइयों से निकले इन गीतों के साथ ही बुधवार सुबह छठ के व्रतियों ने सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही चार दिनी छठ महा पर्व का समापन हो गया।

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‘सुन छठ मय्या हमरी अरजियां’
उगते सूरज को अर्घ्य देकर की खुशहाली की कामना  
रुद्रपुर/काशीपुर। पूर्वांचल समाज में आस्था के सबसे बड़े पर्व छठ पूजा का बुधवार को विधिवत समापन हो गया। छठ घाटों पर सुबह साढ़े छह बजे दंपतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अखंड सौभाग्य व पुत्र के दीर्घायु की कामना की। बुधवार तड़के तीन बजे से ही रुद्रपुर के किच्छा रोड स्थित छठ घाट, तीनपानी, भूरारानी, दरियानगर और अटरिया मंदिर के निकट बने छठ घाटों पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी।

बुधवार सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतधारियों ने अपना निर्जला व्रत तोड़ा। उत्तराखंड पूर्वांचल छठ पूजा लोक कल्याण समिति के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि सुबह करीब साढ़े छह बजे छट घाट पर सैकड़ों लोगों ने उगते सूरज को अर्घ्य दिया। वहां बीना देवी, रानी देवी, गुड़िया, प्रमिला साहनी, नंदलाल शर्मा, पंकज चौधरी, सुभाष राव, श्रीकांत शर्मा आदि थे।
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 काशीपुर बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा संपन्न की। महिलाओं ने चैती चौराहा पर महादेव माइनर घाट, मोटेश्वर महादेव मंदिर के पास बने घाट, आईजीएल मोड़ पर बने घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। 

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