काशीपुर। प्रसिद्ध ऐतिहासिक चैती मेला में इस वर्ष दुकान-तहबाजारी का ठेका महंगा होने और दुकानें महंगी मिलने से दुकानदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। बताते हैं कई दुकानदार तो दुकानों के दाम सुनकर वापस लौट गए हैं।
मेले में इस वर्ष दुकान-तहबाजारी का ठेका 2,63,55,992 रुपये में हुआ है। जबकि बीते वर्ष यह ठेका 2,21,00,000 रुपये में हुआ था। इस वर्ष ठेका पचास लाख रुपये अधिक में छूटा था। इसके चलते मेला ठेकेदार ने भी दुकानों के दाम बढ़ा दिए हैं। साथ ही ठेकेदार ने बीते वर्ष जहां 500 दुकानों का निर्माण कराया था। वहीं इस वर्ष 400 दुकानों का निर्माण करा रहे हैं।
ठेकेदार केडी भारद्वाज उर्फ गांधी का कहना है कि खानपान के दुकानदारों को सिलिंडर की जरूरत है लेकिन वर्तमान में कॉमर्शियल सिलिंडर की किल्लत से वह यहां आना नहीं चाह रहे हैं। उनका प्रयास है कि खानपान दुकानदारों की समस्या का अधिकारियों से बात कर समाधान निकाला जाए।
वहीं, मेला से जुड़े लोगों ने बताया कि 2018 से पहले 800-900 दुकानें लगती थीं। जब से सरकारीकरण और टेंडर महंगा होने लगा है, जिससे दुकानदारों ने आना कम कर दिया है। दुकानें महंगी होने से पहले की अपेक्षा प्रसाद की दुकान भी कम हैं। हालांकि कुछ दुकानदारों ने आना शुरू कर दिया है।
दुकानदारों को कराना होगा सत्यापन
मेले में आने वाले दुकानदारों, खेल-तमाशा व उनके कर्मचारियों का पुलिस से सत्यापन कराना होगा। इस संबंध में आईटीआई कोतवाली प्रभारी रवि सैनी ने बताया कि इस संबंध में दुकान-तहबाजारी व खेल-तमाशा ठेकेदारों को निर्देशित किया गया है कि वह दुकान बुकिंग के दौरान ही दुकानदार व उनके कर्मचारियों का आधार कार्ड लें और सत्यापन करा लें।