सुरेंद्रनगर स्थित तारकनाथ धाम व बैकुंठपुर शिव मंदिर में आयोजित चड़क पूजा अनुष्ठान में सन्यासियों ने कई हैरतअंगेज करतब दिखाकर श्रद्धालुओं को अचंभित किया। पीठ में लोहे के कांटे (हुक) में रस्सी के सहारे कार को खींचने के साथ हवा में जमकर झूले। मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा ने सुरेंद्रनगर मंदिर परिसर में करीब 10 हजार वर्ग फीट की छत निर्माण कराने की घोषणा की।
सौरभ ने फीता काटकर चड़क पूजा अनुष्ठान का शुभारंभ किया। पूजा कमेटी की मांग पर उन्होंने विधायक निधि से मंदिर परिसर में संन्यासियों की सुविधा के लिए विशाल छत निर्माण की घोषणा की। इससे पूर्व मंगलवार की सुबह मंदिर परिसर के बीचोबीच करीब 40 फीट ऊंचा लकड़ी का खंभा गाड़कर बांस की बल्लियों से विशाल चरखे का निर्माण किया गया। पश्चिम बंगाल के नदिया जिला निवासी संन्यासी प्राण गोपाल व्यापारी उर्फ पाखी, कुटीश्वर मित्र, ट्रांजिट कैंप रुद्रपुर निवासी बबलू चक्रवर्ती व जेलकैंप निवासी सुकुमार हालदार ने अपनी पीठ की चमड़ी में लोहे के कांटे चुभोकर विशाल चरखे के सहारे कलाबाजी कर बाजीगरी का प्रदर्शन किया। बबलू व कुटीश्वर ने कांटे में रस्सी के सहारे कार को खींचकर मंदिर परिसर के तीन चक्कर लगाए। सन्यासी पाखी व दुखीराम शील ने नंगे शरीर से ट्यूब लाइट तोड़ने के करतब को दिखाए।
चड़क पूजा देखने आए श्रद्धालुओं के जनसैलाब का नियंत्रित करने के लिए सितारगंज कोतवाल डीआर आर्य व चौकी प्रभारी केजी मठपाल ने पुलिस व पीएसी के सिपाहियों के साथ मोर्चा संभाला। इस मौके पर नगर पंचायत चेयरमैन सुकांत ब्रहृम, प्रधान उत्तम शील, सुशांत राय, संजीत विश्वास, परेश मंडल, दिलीप राय, शंभू साना, श्यामल सरकार, रामचंद्र राय, ब्रिन्ची बाईन, धीमान सेन, मुकुल पोद्दार, राम मिस्त्री, रंजीत हालदार, पतिराम मंडल, आनंद सरकार आदि थे।
दिनेशपुर। ‘चड़क पूजा’ के साथ बाबा तारकनाथ की पूजा संपन्न हो गई। अंतिम दिन की पूजा में सैकड़ों की संख्या में उपासकों और संन्यासियों ने भाग लेकर व्रत तोड़े।
मंगलवार को चैत्र माह के अंतिम दिन नगर के वार्ड तीन के शिव मंदिर के अलावा अमृतनगर और महतोष में आयोजित ‘चड़क पूजा’ में पिछले एक महीने से कठिन व्रत का पालन कर रहे उपासकों और संन्यासियों ने भाग लिया। सभी स्थानों पर लकड़ी के खंभों से चड़क तैयार किया गया। चड़क के सामने ‘पाठ’ (नीम और चंदन की लकड़ी से तैयार शिवलिंग) को रखकर तंत्रधारक मूल संन्यासी ने पूजा अर्चना की। देर शाम को चड़क घुल्ली का आयोजन हुआ। चड़क के दोनों सिरों पर बंधी रस्सी में कांटे बांधे गए। फिर उसे संन्यासियों के कमर में चुभाकर घुमाया गया। इस दौरान संन्यासियों ने अनेक हैरतअंगेज करतब भी दिखाए। बाद में पूजा अर्चना के साथ सभी ने व्रत तोडे़ और शिवगोत्र को त्यागकर अपने मूल गोत्र को अपनाया। बुधवार को सामूहिक भोज का आयोजन होगा।