नगर स्थित ऊधमसिंह नगर डिस्ट्रिक्ट को-आपरेटिव बैंक में लाखों की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है। रुपये जमा करने के बावजूद दर्जनों खाताधारकों के खाते से लाखों की रकम गायब है। संदेह के घेरे में आया कैशियर चार दिन से बैंक से गैरहाजिर है।
विभाग द्वारा मामले की लीपापोती करने की कोशिश के बावजूद घपला उजागर होने पर शाखा प्रबंधक ने खाता धारकों द्वारा लिखित शिकायत किए जाने की बात कबूली है। बैंक के डीजीएम हीराराम ने कहा शाखा प्रबंधक के माध्यम से खाताधारकों की लिखित शिकायत मंगाई गई है। प्रकरण की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
डिस्ट्रिक्ट को-आपरेटिव बैंक के खाता धारकों के बैंक अकाउंट में हेराफरी का खेल पिछले तीन साल से चल रहा है। बैंक को सीबीएस हुए करीब दो साल होने को है। इसके बावजूद अधिकांश उपभोक्ताओं की पास बुक मैनुअल ही है। जिसमें कैशियर द्वारा हाथ से लिखकर जमा और निकाली गई धनराशि की इंट्री की जाती है।
इसी की आड़ में इस शाखा में वर्षों से तैनात कैशियर ने हेराफेरी का नायाब तरीका खोज निकाला। रकम जमा करने वाले को रसीद व मैनुअल खाते में इंट्री कर दी गई। परंतु उसका बैंक के कैश लेजर में कहीं उल्लेख ना कर धनराशि गबन कर ली। खाता धारकों द्वारा बैंक से कम्प्यूटरीकृत पास बुक प्राप्त कर उसमें जमा की गई रकम का मिलान करने पर उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई पर बैंक कर्मियों द्वारा डाका डालने का आभास हुआ।
खाता धारकों को पूर्व में दी गई मैनुअल पास बुक में रकम की इंट्री होने के बावजूद कम्प्यूटरीकृत पास बुक में दर्ज नहीं था। वार्ड संख्या एक के बाबूराम के खाते से 85 हजार, सतीश कुमार के खाते से 45 हजार, गुरूग्राम निवासी शंकर राय के खाते से 40 हजार व देवनगर निवासी रेखा विश्वास के खाते से 46 हजार की धनराशि गायब मिली।
गबन का शिकार खाताधारकों की संख्या और भी है। रकम डूबने की आशंका से घबराए खाता धारकों ने इसकी शिकायत शाखा प्रबंधक शंकर सहाय से की। सहाय की सूचना पर बैंक के डीजीएम हीरा राम ने 19 मार्च को बैंक आकर मामले की जांच की। इस दौरान कुछ खाता धारकों ने अपने पुराने व नए पास बुक को दिखाकर मामले की शिकायत की।
सूत्रों के अनुसार मामला करीब पंद्रह दिन पहले उजागर हुआ। जब बैंक से रकम निकालने गए एक कांग्रेसी नेता ने खाते में धनराशि कम पाकर खाते में जमा की गई रकम का मिलान किया। उस दौरान बैंक कर्मियों ने भूल की क्षमा याचना कर और जमा रकम लौटा कर मामले को रफा दफा कर दिया। और किसी को मामले की कानों-कान खबर नहीं होने दी।
सूत्रों के मुताबिक ऐसे खाता धारकों की संख्या दर्जनों में है जिनके लाखों की रकम को डकारने का प्रयास किया गया है। मामला संज्ञान में आने के बावजूद किसी कर्मी के खिलाफ अभी तक किसी प्रकार की कार्यवाही को अमल में ना लाना आश्चर्यजनक है।