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रपटा पुल मामले में निर्माण एजेंसी के खिलाफ मुकदमा 

Thu, 20 Dec 2018 11:53 PM IST
दीपक नेगी ब्यूरो/ऊधमसिंह नगर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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शहर में बुधवार को हुए अभिनंदन समारोह में सीएम की ओर से लापरवाह ठेकेदारों और निर्माण संस्थाओं पर सख्ती किए जाने के बयान का पहला असर किच्छा में ही देखने को मिला है। नगर की पुरानी मंडी में बनाए गए रपटा पुल का निर्माण करने वाली एजेंसी के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। 

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सिडकुल पंतनगर के जनसंपर्क अधिकारी कमल किशोर ने बृहस्पतिवार को कोतवाली में राजकीय मेडिकल परिसर रामपुर रोड हल्द्वानी स्थित उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम लिमिटेड इकाई के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज कराया है। इसमें कहा गया है कि सिडकुल पंतनगर में अवस्थापना सुविधाओं के अंतर्गत किच्छा और एनएच-74 पिपलिया मोड़ तक मार्ग निर्माण (रपटा पुल) स्वीकृत कर 28 फरवरी 2015 को तत्कालीन परियोजना प्रबंधक यूपी निर्माण निगम लि. इकाई रुद्रपुर को 370.41 लाख की लागत पर दिया गया था। इसके तहत सिडकुल की ओर से 2015 में 90 लाख, 2016 में 216 लाख, 2017 में 27 लाख और 2018 में 27 लाख कुल 360 लाख की धनराशि कार्यदायी संस्था को आवंटित की गई थी। बताया कि वर्तमान में निर्माण इकाई रुद्रपुर को हल्द्वानी इकाई में समायोजित कर दिया गया है। 

सिडकुल मुख्यालय की जांच में पाया गया कि निर्माण के कुछ महीनों बाद ही रपटे पुल का अगला पूर्वी हिस्सा बरसात में बह गया था, तब से उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। रपटे पुल का लाभ जनता को आज तक नहीं मिलने से इसका उद्देश्य असफल हो गया। इस संबंध में सिडकुल मुख्यालय देहरादून ने एक सितंबर 2018 को निर्माण इकाई को पत्र भेजकर कुल व्यय की प्रतिपूर्ति दो सप्ताह के भी सिडकुुल मुख्यालय को करने के लिए निर्देशित किया था, लेकिन कार्यदायी संस्था ने आज तक सिडकुल मुख्यालय (देहरादून) को उक्त धनराशि नहीं लौटाई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने निर्माण संस्था को शासकीय धन के दुरुपयोग का दोषी मानते हुए केस दर्ज कर लिया है। 
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रपटा पुल से पिपलिया उेढ़ किमी वाया पुलभट्टा 10 किमी 
किच्छा। रपटा पुल बनाने की मांग नगर के पूर्वी छोर पर बसे ग्राम बखपुर, नजीमाबाद, पिपलिया, भगवानपुर, गऊघाट, शक्तिफार्म, शहदौरा, अलीनगर आदि गांवों के ग्रामीण कई वर्षों से कर रहे थे। इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि इस रपटा पुल के बन जाने से पिपलिया की दूरी किच्छा से मात्र दो किमी रह जाती है। वर्तमान में पुल नहीं होने के चलते ग्रामीणों को वाया पुलभट्टा जाना पड़ता है, जिससे उन्हें करीब 10 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। 

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