काशीपुर। सावन मास के चलते चिकन-मटन और मछली का कारोबार ठंड पड़ गया है। अब बाजार में 10 फीसदी ही डिमांड है। दुकानदारों को नौ अगस्त के बाद कारोबार के गति पकड़ने की उम्मीद है।
सावन मास का महीना हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण पर्व होता है। इस दौरान अधिकतर हिंदू धर्म के लोग अपने आराध्य की अराधना करते हैं। युवा पीढ़ी हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लाकर अपने आराध्यक्ष का जलाभिषेक करती है। इसके चलते इस पूरे महीने नॉनवेज खाने के शौकीन इन खाद्य वस्तुओं से परहेज करते हैं और इनका सेवन नहीं करते हैं। कटोराताल स्थित एक मीट कारोबारी ने बताया कि आम दिनों में शहर में बकरे का मीट 20-25 क्विंटल और मुर्गे का मीट 50 क्विंटल के लगभग बिक जाता था। अब सावन मास के चलते होटलों, रेस्टोरेंट, ठेलों वालों के साथ ही घर में इसका प्रयोग 10 फीसदी ही हो रहा है। साप्ताहिक बाजारों में नॉनवेज के शौकीन बहुत कम आ रहे हैं। उनके सामने आर्थिक संकट है क्योंकि उनके पास कोई और रोजगार नहीं है। बताया कि शहर के अंदर लगभग 50 चिकन-मटन की और 15-20 मछली विक्रेताओं की दुकानें हैं। अधिकतर सभी दुकानदारों का कारोबार इस दौरान ठंडा पड़ा है। अब नौ अगस्त के बाद कारोबार में गति आने की उम्मीद है।