काशीपुर। पुरातत्व विभाग के अधीन गोविषाण टीले पर जल्द ही झाड़ी कटान और साफ-सफाई की जाएगी। इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो गई है। टीले पर तेंदुओं की दहशत को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
काशीपुर पुरातत्व विभाग के पुरातन सहायक दिनेश शर्मा ने बताया कि टीले के आसपास छह से अधिक तेंदुए रहते हैं। इसके चलते टीले पर आम लोगों के जाने पर पाबंदी लगाई है। यह टीला ऐतिहासिक है। इसे गोविषाण टीला नाम से जाना जाता है। यह दो शब्दों गो (गाय) और विषाण (सींग) से बना है। इसका अर्थ गाय का सींग है। प्राचीन समय में गोविषाण को तत्कालीन समय की राजधानी व समृद्ध नगर कहा गया है। बताया कि सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी भारत यात्रा के दौरान इस स्थान का वर्णन किया है। टीले पर उगी झाड़ियों को काटा जाएगा ताकि यहां पर हिंसक जानवरों का वास कम हो सके। जल्द ही निविदा होने के बाद झाड़ियों का काटा जाएगा।