एक समय एड्स के शिकंजे में जकड़ा तराई अब धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है। सरकारी आंकड़ों में जिले में दो सालों से एचआईवी संक्रमित रोगियों की संख्या घट रही है। लेकिन जिलेभर में सबसे ज्यादा संक्रमित रोगी रुद्रपुर के ही हैं। अधिकारी रोगियों की संख्या में कमी आने का बड़ा कारण जागरूकता बता रहे हैं।
इसे संयोग या कुछ भी कह लीजिए लेकिन जिले के काशीपुर के बाद रुद्रपुर में औद्योगिकीकरण की शुरुआत से एचआईवी मरीजों की संख्या में भी इजाफा होना शुुरू हो गया था।
अधिकांश एड्स मरीज या तो वाहन चालक थे या फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक। साल 2003 में जिले में राष्ट्रीय एड्स कंट्रोल प्रोग्राम की भी शुरुआत की गई। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2003 में 223 लोगों की जांच हुई थी, जिनमें रुद्रपुर के दो मरीज पॉजीटिव पाए गए थे। दोनों ही मरीज पुरुष थे। दो मरीजों से साल दर साल आंकड़ा वर्ष 2013 में 92 तक जा पहुंचा था, लेकिन फिर आंकड़े में कमी होनी शुरू हुई और इस साल यह आंकड़ा अक्तूबर 2015 तक 66 पर है। इनमें 44 पुरुष और 22 महिलाएं शामिल हैं। अभी तक 12 सालों में जिलेभर में 1,14,642 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 574 पॉजीटिव मिले हैं, जिनमें 382 पुरुष और 192 महिलाएं हैं। हालांकि सरकारी रिकार्ड में एड्स से मरने वाले मरीजों की संख्या का उल्लेख नहीं है, लेकिन अनुमान के मुताबिक अब तक 30 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। कुल मिलाकर सरकारी रिकार्ड में एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी को जागरूकता का असर ही कहा जा सकता है।