रुद्रपुर। सरकार की पांच फीसदी क्षैतिज आरक्षण नीति अनाथ बच्चों के लिए वरदान साबित हुई है। इस नीति के तहत कई बच्चों ने सरकारी सेवाओं में अपना स्थान बनाया है। यह आरक्षण उन बच्चों को मिला जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु 21 वर्ष की आयु से पहले हो गई।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2021 में यह नियमावली लागू की थी। इसका उद्देश्य लोक सेवाओं में अनाथ बच्चों को अवसर प्रदान करना है। यह आरक्षण उन बच्चों के लिए है जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु 21 वर्ष की आयु से पहले हो गई हो। ऊधम सिंह नगर के तीन बच्चों का विभिन्न विभागों में चयन हुआ है। काशीपुर के राजकुमार का सिंचाई विभाग में निरीक्षक पद पर चयन हुआ। जसपुर की निष्ठा सिंह मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर में फार्मासिस्ट बनी हैं। बाजपुर की विशाखा का चयन वन दरोगा के पद पर हुआ है। यह सभी चयन क्षैतिज आरक्षण के आधार पर हुए हैं।
डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश
इसके अतिरिक्त दो अन्य बच्चों को भी लाभ मिला है। बन्नाखेड़ा बाजपुर की वर्षा का चयन दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स डीएलएड के लिए हुआ है। भरतपुर कुंडा काशीपुर की उपासना भी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए आवश्यक डीएलएड कोर्स में प्रवेश पा चुकी हैं। इस आरक्षण से उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
वर्जन::
डीएम और सीडीओ के मार्गदर्शन में अनाथ बच्चों को क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिल रहा है। जिले के लिए बच्चों ने आरक्षण के जरिये सरकारी विभागों में नौकरी पाई है। दो का चयन डीएलएड में हुआ है। सरकार की योजना को हर जरूरतमंद तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। - व्योमा जैन, जिला प्रोबेशन अधिकारी