रुद्रपुर। चार प्रमुख मांगों को लेकर बंगाली समाज का आक्रोश रविवार को सड़कों पर उतर आया। पिछले 10 दिनों से रामलीला मैदान में चल रहे धरने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने कलक्ट्रेट कूच किया। इस दौरान पुलिस से नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई।
रविवार को बंगाली समाज के लोग रुद्रपुर के रामलीला मैदान में जुटे। यहां संबोधन के बाद मैदान से जुलूस निकाला गया। नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी कलक्ट्रेट पहुंचे। पुलिस ने उन्हें गेट पर रोकने का प्रयास किया। संख्या अधिक होने के कारण प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा पार कर कलक्ट्रेट परिसर में दाखिल हो गए और वहीं धरने पर बैठ गए।
बंगाली कल्याण समिति ने बताया कि चार मांगों के लिए वर्ष 2024 से संघर्ष कर रहे हैं। पिछले 10 दिन से धरना चल रहा था। इसके बाद भी शासन-प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा है। बंगाली समाज ने धरने के बाद सीडीओ दिवेश शासनी को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने की चेतावनी दी। समिति ने कहा कि पहले देहरादून में प्रदर्शन होगा और इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा।
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युवक और सिपाही की बहस से तनाव
बंगाली समाज ने पूर्व से ही कलक्ट्रेट कूच का एलान किया था। इसे देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बावजूद इसके कलक्ट्रेट के अंदर जाने के प्रयास में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में धक्का-मुक्की हुई। इसी दौरान एक युवक और पुलिस के बीच हाथापाई की नौबत भी आ गई थी। युवक के सिपाही का कॉलर पकड़ने से कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
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इन मांगों के लिए आंदोलित है समाज
-उत्तराखंड में पुनर्वासित बंगाली समुदाय को अनुसूचित जाति की मान्यता दी जाए।
-शक्तिफार्म समेत अन्य क्षेत्रों में 216 परिवारों के निरस्त पट्टों को बहाल कर भूमिधरी अधिकार दिए जाएं।
-प्राथमिक से स्नातकोत्तर स्तर तक बांग्ला भाषा की शिक्षा की व्यवस्था लागू की जाए।
-नमःशूद्र, पौंड्र और माझी समुदाय के विद्यार्थियों को बंद एससी छात्रवृत्ति एवं शैक्षिक सहायता दोबारा दी जाए।