राज्य के 17 राजकीय स्नातकोत्तर विद्यालयों में संचालित स्ववित्त-पोषित बीएड पाठ्यक्रम को राज्य पोषित किए जाने की मांग को लेकर बीएड छात्र-छात्राओं ने जुलूस निकाला। इस दौरान उन्होंने डीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। चेताया कि यदि जल्द ही शासन ने अपना नया शासनादेश वापस नहीं लिया, तो आंदोलन किया जाएगा।
बुधवार को दर्जनों की संख्या में बीएड छात्र-छात्राएं नैनीताल रोड पर एकत्र हुईं और जुलूस की शक्ल में डीएम कार्यालय पहुंचे। कहना था कि वर्ष 2008 को तत्कालीन खंडूड़ी सरकार ने निर्धन विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य के 17 राजकीय महाविद्यालयों में बीएड स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम को संचालित किया, उस समय एक वर्षीय पाठ्यक्रम का शुल्क 28,400 रुपये निश्चित किया था। जिसे बढ़ा कर 32 हजार कर दिया, लेकिन 2015-16 में यह पाठ्यक्रम एनसीटीई में दो वर्ष कर दिया।
जिसका शुल्क बढ़ाकर 70 हजार रुपये और प्रत्येक महाविद्यालय के सीटों की संख्या घटाकर 100 से 50 कर दी है। आरोप लगाया कि महज चार ही महाविद्यालयों में ही बीएड पाठ्यक्रम सरकारी स्तर पर चलाया जा रहा है। जिसकी दो वर्ष की फीस 12000 हजार रुपये है। उन्होंने सरकार से स्ववित्त पोषित योजना को पुन: की भांति किए जाने की मांग की। इस मौके पर अभिषेक तिवारी, रचित सिंह, रतना, अनिल सिंह, सोनिया, ममता आर्या, आस्था, रूचि वर्मा, रिचा रावत, सुरभि अरोरा, अमरदीप आदि मौजूद थे।